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जोधपुर हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म मामले में पॉक्सो कोर्ट के न्यायिक अधिकारी की जांच के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा मामला

जोधपुर हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म मामले में पॉक्सो कोर्ट के न्यायिक अधिकारी की जांच के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा मामला

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर जिले के लूणी थाना क्षेत्र में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में न्यायिक रिकॉर्ड में पाई गई गंभीर विसंगतियों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित पॉक्सो कोर्ट के न्यायिक अधिकारी के आचरण की जांच के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया है।

साथ ही हाईकोर्ट ने आरोपी किशोर को वैधानिक (डिफॉल्ट) जमानत देने का आदेश भी जारी किया है। न्यायालय ने इस कदम को रिकॉर्ड में पाई गई विसंगतियों और मामले में उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।

मामला अगस्त 2025 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक किशोर और अन्य व्यक्ति ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। यह मामला नाबालिग से जुड़े होने के कारण अत्यंत संवेदनशील है और इसके तहत पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट ने नोट किया कि जांच और सुनवाई के दौरान न्यायिक प्रक्रिया में कई विसंगतियां सामने आई हैं, जिनसे यह सवाल उठता है कि पॉक्सो कोर्ट के न्यायिक अधिकारी ने अपने कर्तव्यों का सही पालन किया या नहीं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सख्त निगरानी और पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि नाबालिग पीड़िता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि न्यायिक रिकॉर्ड में कोई विसंगति होती है, तो यह न केवल मामले की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है, बल्कि पीड़िता और उसके परिवार के लिए भी मानसिक और कानूनी दबाव बढ़ा सकती है।

पॉक्सो कोर्ट के न्यायिक अधिकारी के आचरण की जांच मुख्य न्यायाधीश को भेजे जाने का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं और रिकॉर्डिंग पूरी तरह से सही ढंग से की गई हों। कोर्ट का यह कदम न्यायपालिका की जवाबदेही और संवेदनशील मामलों में सुरक्षा और निष्पक्षता की भूमिका को स्पष्ट करता है।

जिला प्रशासन और पुलिस ने भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जमानत प्रक्रिया और आरोपी किशोर की वैधानिक जमानत को लागू कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट की निगरानी में पूरी की जाएगी।

इस मामले ने जोधपुर जिले में नाबालिग से जुड़े दुष्कर्म मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सख्ती और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह कदम भविष्य में समान मामलों में न्यायपालिका की जिम्मेदारी को और मजबूत करेगा और नाबालिग पीड़िताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।

इस तरह, जोधपुर हाईकोर्ट ने न केवल आरोपी किशोर को वैधानिक जमानत दी, बल्कि न्यायिक अधिकारी की जिम्मेदारी और रिकॉर्ड की जांच के लिए स्पष्ट संदेश भी दिया है, जिससे संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता बनी रहे।

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