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'जिस परम शक्ति से पूरा संसार संचालित होता है, उन मां का नमन करते हैं', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

'जिस परम शक्ति से पूरा संसार संचालित होता है, उन मां का नमन करते हैं', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित
'जिस परम शक्ति से पूरा संसार संचालित होता है, उन मां का नमन करते हैं', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार को मां भगवती की शक्ति का संदेश देते हुए सोशल मीडिया पर सुभाषित साझा किया गया है।

पीएम की ओर से संस्कृत श्लोक, "देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥" साझा किया गया, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जिस परम शक्ति से पूरा संसार संचालित होता है और जिसमें सभी देवताओं की शक्तियाँ समाहित हैं, उन मां अम्बिका को हम पूरी श्रद्धा और भक्ति से नमन करते हैं। वस्तुतः देवता और महर्षि भी उनकी आराधना करते हैं। मां अंबिका, हम सबका कल्याण करें।

प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक श्रीदुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय (शक्रादि स्तुति / इंद्रकृत स्तुति) से लिया गया है। यह श्लोक सामूहिक कल्याण, विश्व रक्षा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए एक अत्यंत प्रभावी और सिद्ध मंत्र के रूप में माना जाता है।

जब देवी मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, तब इंद्र (शक्र) एवं समस्त देवताओं ने प्रसन्न होकर और भयमुक्त होकर भगवती की जो स्तुति की थी, यह श्लोक उसी स्तुति का हिस्सा है। इसका उपयोग विशेष रूप से सामूहिक कल्याण एवं विश्व में शांति के लिए 'सिद्ध संपुट मंत्र' के रूप में भी किया जाता है।

इस श्लोक का भावार्थ है कि "संपूर्ण देवताओं की शक्ति का समुदाय ही जिनका स्वरूप है तथा जिन देवी ने अपनी शक्ति से संपूर्ण जगत को व्याप्त कर रखा है, समस्त देवताओं और महर्षियों की पूजनीया उन जगदंबा को हम भक्तिपूर्वक नमस्कार करते हैं। वे हम सबका कल्याण करें।"

सोमवार को नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी शांत, तेजस्वी और ज्योतिर्मय रूप में श्वेत वस्त्र धारण किए रहती हैं। इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इन्हें तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा के नाम से भी जाना जाता है। इनकी आराधना से मन में संयम, त्याग, वैराग्य, सदाचार और आत्मबल की वृद्धि होती है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

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