झारखंड: उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग तेज, भाजपा बोली- राज्य में हर परीक्षा में धांधली
रांची, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को एक संयुक्त प्रेसवार्ता में विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पिछले तीन वर्षों में हुई सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग की है।
हटिया के विधायक नवीन जयसवाल ने मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार के मन में कोई खोट नहीं है और वह युवाओं को न्याय दिलाना चाहती है तो उसे तत्काल सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए।
जयसवाल ने आरोप लगाया कि 12 अप्रैल को हुई परीक्षा से ठीक एक दिन पहले तमाड़ के जंगलों में 179 अभ्यर्थियों का एक साथ पकड़ा जाना और अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना अतुल वत्स की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि पेपर लीक बड़े पैमाने पर हुआ है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर मामले की 'लीपापोती' करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर तमाड़ थाना प्रभारी प्रश्न पत्र प्रिंटिंग प्रेस से चोरी होने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन इसे पेपर लीक मानने से इनकार कर रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वहां केवल कोचिंग चल रही थी तो 180 लोगों को जेल क्यों भेजा गया?
पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने परीक्षा लेने वाली एजेंसी की विश्वसनीयता पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक ऐसी एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा सौंपा जिसका रजिस्ट्रेशन 2026 में हुआ है और जिसे बिहार की शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
मंडल ने कहा, "यह विडंबना है कि बिहार और ओडिशा जैसी जगहों पर ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के लिए झारखंड सरकार रेड कारपेट बिछाकर बैठी है। जेएसएससी सीजीएल के वक्त भी यही हुआ था।" उन्होंने दावा किया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और विवादित एजेंसियों से सरकार का "अगाढ़ प्रेम" यह दर्शाता है कि झारखंड में नौकरियों की खुली बोली लगाई जा रही है।
भाजपा नेताओं ने परीक्षा के पैटर्न पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले फिजिकल टेस्ट कराना और उसमें कई युवाओं की जान जाना सरकार की गलत नीतियों का परिणाम था। जयसवाल के अनुसार, पहले लिखित परीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन पर्दे के पीछे बैठे सफेदपोशों के इशारे पर पहले फिजिकल कराया गया ताकि क्वालीफाई करने वाले बच्चों से संपर्क कर पैसों का खेल खेला जा सके।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि उन्हें राज्य की जांच एजेंसियों या सीआईडी पर भरोसा नहीं है। पार्टी ने मांग की है कि केवल उत्पाद सिपाही ही नहीं, बल्कि पिछले 3 साल की सभी संदिग्ध परीक्षाओं की जांच केंद्र सरकार की एजेंसी सीबीआई से कराई जाए। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार मुख्य सरगनाओं का खुलासा नहीं करती और सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं करती तो भाजपा सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।
--आईएएनएस
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