झारखंड ट्रेजरी घोटाले की जांच लगातार टाल रही हेमंत सरकारः भाजपा
रांची, 2 जून (आईएएनएस)। झारखंड में ट्रेजरी घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर राज्य सरकार पर निशाना साधा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि घोटाले की विशेष ऑडिट कर रहे अकाउंटेंट जनरल (एजी) को राज्य सरकार अब तक जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने लंबे समय तक कार्रवाई करने में आनाकानी की और दबाव बढ़ने पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन ट्रेजरी अधिकारियों और डीडीओ के कार्यकाल में कथित अनियमितताएं हुईं, वे अब भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को कथित घोटाले की स्पेशल ऑडिट कराने के लिए एजी को अनुशंसा भेजी थी। एजी ने उसी सप्ताह संबंधित दस्तावेजों की मांग की थी, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं कराए हैं। उनके अनुसार दस्तावेज नहीं मिलने के कारण विशेष ऑडिट शुरू नहीं हो सकी है।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार मामले को टालने और समय बिताने की रणनीति अपना रही है, जिससे पूरे प्रकरण को दबाया जा सके। उन्होंने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वित्त विभाग की एसआईटी और उत्पाद सचिव के नेतृत्व वाली जांच टीम ने अब तक केवल बोकारो जिले का दौरा किया है। दो महीने बीत जाने के बावजूद जांच की कोई रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में बोकारो, हजारीबाग, रांची, रामगढ़ और देवघर समेत पांच जिलों की जांच की अनुशंसा की गई थी, लेकिन अन्य जिलों में अभी तक जांच दल नहीं पहुंचा है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जांच की गति बेहद धीमी है, और यदि इसी रफ्तार से काम चलता रहा, तो जांच पूरी होने में कई वर्ष लग सकते हैं। उन्होंने राज्य सरकार को चारा घोटाले का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में समय पर और प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से एसआईटी जांच के लिए समयसीमा तय करने और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यदि राज्य सरकार प्रभावी जांच नहीं करा पा रही है तो पूरे मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंप देना चाहिए।
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