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झारखंड सरकार की चेतावनी, 48 घंटे से अधिक समय तक बायो मेडिकल वेस्ट रखा तो सख्त कार्रवाई

रांची, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि अब बिना उपचार (अनट्रीटेड) बायो-मेडिकल कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक किसी भी हाल में संग्रहित नहीं रखा जा सकेगा।
झारखंड सरकार की चेतावनी, 48 घंटे से अधिक समय तक बायो मेडिकल वेस्ट रखा तो सख्त कार्रवाई

रांची, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि अब बिना उपचार (अनट्रीटेड) बायो-मेडिकल कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक किसी भी हाल में संग्रहित नहीं रखा जा सकेगा।

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में राज्य में बायो वेस्ट निपटारे के लिए नई कॉम्प्रिहेंसिव गाइडलाइन तैयार करने का निर्णय लिया गया। नई व्यवस्था के तहत कचरे की निगरानी के लिए बारकोडिंग और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि हर चरण पर निगरानी सुनिश्चित हो सके।

खासतौर पर 48 घंटे की समय-सीमा को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है, जिससे संक्रमण और प्रदूषण के खतरे को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने साफ तौर पर कहा कि बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि इसका सीधा असर पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य पर पड़ता है।

उन्होंने निर्देश दिया कि कचरे के उठाव से लेकर अंतिम निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में पांच कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी संचालित हैं, जहां कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है।

हालांकि, नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसमें पर्यावरण मुआवजा दंड लगाने के साथ-साथ संबंधित संस्थान का पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल है।

इसके अलावा, राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में बायो-मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए ‘डीप बरियल’ जैसे वैज्ञानिक तरीकों के मानक अनुपालन को भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि नई गाइडलाइन लागू होने के बाद झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सुरक्षित बनेगी।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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