झारखंड : राज्य अभिलेखागार में 32 में से 31 पद खाली, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
रांची, 27 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड के गौरवशाली इतिहास, प्रशासनिक और सामाजिक यात्रा के दस्तावेजों को सहेजने वाले रांची स्थित राज्य अभिलेखागार की बदहाली पर झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। गुरुवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से 1 अक्टूबर, 2026 तक जवाब तलब किया है।
शशि सागर वर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ को अवगत कराया कि मैनपावर की भारी कमी के कारण राज्य के सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रूम का अस्तित्व ही खतरे में है। याचिका के अनुसार, यह अभिलेखागार वर्तमान में मात्र एक कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। इस संस्थान में स्वीकृत 32 पदों में से 31 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
अमूल्य रियासतकालीन पट्टों, ऐतिहासिक भू-अभिलेखों और प्राचीन दस्तावेजों के संरक्षण पर मंडराते संकट को देखते हुए याचिका में अदालत से राज्य सरकार को इस संबंध में तत्काल जरूरी कदम उठाने के लिए निर्देशित करने की गुहार लगाई गई है। अदालत को बताया गया कि इस अभिलेखागार में रियासतकाल के वे दुर्लभ दस्तावेज, पट्टे और नक्शे मौजूद हैं, जिनकी उपयोगिता प्रशासनिक, न्यायिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है। वहीं, स्टाफ न होने से न तो नए दस्तावेजों की सूची बन पा रही है और न ही पुराने गल रहे पन्नों का डिजिटलीकरण हो पा रहा है।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जब तक स्थाई नियुक्तियां नहीं होतीं, तब तक ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 1 अक्टूबर 2026 तक हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करे कि इन रिक्त पदों को भरने और अभिलेखागार के आधुनिकीकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को करेगी।
--आईएएनएस
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