झारखंड में फाइलेरिया के 57 हजार मरीज, 1.75 करोड़ लोगों को दवा देने से बीमारी का खात्मा तय
रांची, 20 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड में फाइलेरिया (हाथीपांव) का खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य में अब तक 57 हजार से अधिक मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन का अभियान मिशन मोड में चलाने का फैसला किया है।
एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) 2026 अभियान के माध्यम से राज्यभर में व्यापक स्तर पर दवा वितरण और सेवन सुनिश्चित कराने की तैयारी की गई है। एमडीए 2026 अभियान के तहत 10 फरवरी से झारखंड के 14 जिलों के 87 प्रखंडों में फाइलेरिया रोधी दवाओं का वितरण किया जाएगा। इस दौरान 14,496 गांवों में रहने वाले लगभग 1.75 करोड़ लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दवाएं केवल वितरित ही नहीं की जाएंगी, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में उनका सेवन भी सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि अभियान का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सके। इस अभियान की समीक्षा के लिए मंगलवार को विभागीय स्टेट टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव, अजय कुमार सिंह ने की।
बैठक में अभियान की रणनीति, संभावित चुनौतियों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी अन्य मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। राज्य सरकार ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कई स्तरों पर तैयारी की है। बैठक में बताया गया कि लिम्फोडेमा मरीजों के इलाज के लिए राज्य में 215 एमएमडीपी क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं।
अब तक 5,053 मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1,714 उच्च प्राथमिकता वाले गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां विशेष निगरानी के साथ अभियान चलाया जाएगा। पंचायत स्तर पर 230 एमडीए मिशन स्क्वाड का गठन किया गया है, जिनमें 289 सामुदायिक स्वयंसेवकों को जोड़ा गया है।
अभियान की सतत निगरानी के लिए राज्य मुख्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है, जहां गूगल शीट के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एमडीए अभियान को केवल दवा वितरण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समुदाय के सभी पात्र लोग लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा का सेवन करें तो झारखंड से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है।
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