झारखंड में बिजली संकट पर पूर्व सीएम रघुवर दास का सरकार पर हमला, कहा-बदहाल है व्यवस्था
रांची, 22 मई (आईएएनएस)। झारखंड में जारी बिजली संकट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने राज्य में लगातार हो रही बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और खराब ट्रांसफॉर्मरों की समस्या पर गहरी चिंता जताते हुए इसे सरकार की लापरवाही का परिणाम बताया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि भीषण गर्मी के बीच राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहद खराब हो गई है। लोगों को घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ शिक्षा, खेती, व्यापार और उद्योगों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और खराब ट्रांसफॉर्मरों को समय पर नहीं बदले जाने से परेशानी और बढ़ गई है।
रघुवर दास ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में राज्य के करीब 38 लाख घरों तक बिजली पहुंचती थी, जिसे उनकी सरकार ने बढ़ाकर 68 लाख परिवारों तक पहुंचाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचा तैयार किया गया था। इसके तहत 4,027 किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन और करीब 1.42 लाख किलोमीटर वितरण लाइन बिछाई गई थी। साथ ही 132 केवी और 220 केवी नेटवर्क का भी विस्तार किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पतरातू थर्मल पावर स्टेशन परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में एनटीपीसी के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की स्थापना की गई थी। इसका लक्ष्य 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई।
हालांकि उन्होंने कहा कि इसी साल मार्च में पहली यूनिट से उत्पादन शुरू हो चुका है और दूसरी यूनिट भी जल्द शुरू होने वाली है। रघुवर दास ने मुख्यमंत्री से बिजली विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, खराब ट्रांसफॉर्मरों को शीघ्र बदलने, लो वोल्टेज और कटौती की समस्या दूर करने, ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क के रखरखाव को प्राथमिकता देने तथा उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है।
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