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झारखंड: आतंकी, हथियार और उगाही मामले में 6 पीएलएफआई सदस्यों को 10-10 साल की सजा

नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के छह सदस्यों को 2018 के आतंकी, हथियार और उगाही से जुड़े मामले में सजा सुनाई है।
झारखंड: आतंकी, हथियार और उगाही मामले में 6 पीएलएफआई सदस्यों को 10-10 साल की सजा

नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के छह सदस्यों को 2018 के आतंकी, हथियार और उगाही से जुड़े मामले में सजा सुनाई है।

झारखंड के रांची स्थित एनआईए विशेष अदालत ने शुक्रवार को गिरफ्तार आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

जिन आरोपियों को सजा हुई है, उनके नाम गुलाब कुमार यादव, रवि यादव, राकेश कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, संतोष यादव और सुरेश यादव हैं। अदालत ने इन्हें पिछले सप्ताह दोषी ठहराया था।

जांच में सामने आया कि ये सभी पीएलएफआई के सक्रिय सदस्य थे और उग्रवादी गतिविधियों, लेवी (जबरन वसूली), नए सदस्यों की भर्ती और संगठन की अन्य आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में शामिल थे।

एनआईए की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी पीएलएफआई के माध्यम से अवैध हथियार हासिल कर रहे थे और हिंसक घटनाओं व उगाही के जरिए आतंक फैलाने में शामिल थे।

आगे की जांच में सामने आया कि संतोष यादव, जो लातेहार और चतरा जिलों का सब-जोनल कमांडर था, संगठन के सदस्यों की भर्ती करने और उन्हें नेतृत्व व दिशा देने में अहम भूमिका निभा रहा था। वहीं, सुरेश यादव ओवरग्राउंड वर्कर और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने वाला व्यक्ति था, जो अवैध हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई में मदद करता था।

यह मामला दिसंबर 2018 में झारखंड पुलिस ने लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के तितिर महुआ जंगल में एक तलाशी अभियान के बाद दर्ज किया था। खुफिया जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी कि वहां पीएलएफआई के हथियारबंद सदस्य बैठक कर रहे हैं।

मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से दो विदेशी राइफल, बड़ी मात्रा में गोलियां, सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए थे।

जून 2019 में एनआईए ने यह मामला झारखंड पुलिस से अपने हाथ में ले लिया था और फरवरी 2020 में छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी संगठित आतंकी गतिविधियों, हथियारों की खरीद और उगाही नेटवर्क चलाने में शामिल थे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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