झारखंड की मगध-आम्रपाली कोल परियोजना में टेरर फंडिंग मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला, 14 आरोपी दोषी करार
रांची, 12 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में रांची की एनआईए की विशेष अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे 14 आरोपियों को दोषी करार दिया।
दोषियों की सजा के बिंदु पर 18 अगस्त को सुनवाई होगी। अदालत ने मामले में आम्रपाली कोल परियोजना के सीसीएल महाप्रबंधक अजीत कुमार ठाकुर को बरी कर दिया। टेरर फंडिंग के एक अन्य आरोपी आक्रमण जी का मामला अदालत में अलग से चल रहा है। दोषी ठहराए गए आरोपियों में विनोद गंझू, मुनेश गंझू, बिरबल गंझू, बिंदु गंझू, कोहराम, सुभान मियां, संजय जैन, प्रेम विकास, मुकेश गंझू, भीखन गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता और अनिश्चय गंझू समेत अन्य शामिल हैं।
एनआईए के अनुसार, इनमें कुछ आरोपी टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के उग्रवादी थे, जबकि कुछ संगठन के लिए लेवी वसूली का काम करते थे। यह मामला टंडवा थाने में दर्ज कांड संख्या 2/2016 से जुड़ा है।
एनआईए ने 13 फरवरी 2018 को इस मामले को अपने हाथ में लिया था। जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में चल रही थी।
जांच के दौरान एनआईए ने मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से होने वाली गतिविधियों के माध्यम से प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) को कथित तौर पर लेवी पहुंचाए जाने का मामला सामने आने का दावा किया था। एजेंसी के अनुसार, कोयला ढुलाई के ठेकों के जरिए उग्रवादी संगठन को आर्थिक मदद पहुंचाने का नेटवर्क चलाया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया था कि टीपीसी को लेवी देने के उद्देश्य से मगध और आम्रपाली परियोजनाओं में कोयला ढुलाई का ठेका ऊंची दर पर लिया गया था। एनआईए ने अपनी जांच में सीसीएल, पुलिस, उग्रवादियों और शांति समिति से जुड़े लोगों के बीच कथित सांठगांठ के जरिए टेरर फंडिंग किए जाने का भी दावा किया था।
एजेंसी ने कहा था कि इस नेटवर्क के माध्यम से टीपीसी को आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे थे। अदालत के बुधवार के फैसले के बाद अब दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर 18 अगस्त को सुनवाई होगी।
--आईएएनएस
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