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झारखंड के 107 प्रखंडों में बीडीओ-सीओ का प्रभार एक अधिकारी को सौंपने का फैसला जनविरोधी: रणधीर सिंह

झारखंड के 107 प्रखंडों में बीडीओ-सीओ का प्रभार एक अधिकारी को सौंपने का फैसला जनविरोधी: रणधीर सिंह
झारखंड के 107 प्रखंडों में बीडीओ-सीओ का प्रभार एक अधिकारी को सौंपने का फैसला जनविरोधी: रणधीर सिंह

रांची, 8 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड सरकार की ओर से 12 से कम पंचायत वाले 107 प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी (सीओ) का प्रभार एक ही अधिकारी को सौंपने के फैसले का भाजपा ने विरोध किया है। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रणधीर सिंह ने इस निर्णय को प्रशासनिक विफलता और जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

रणधीर सिंह ने आईएएनएस से कहा कि सरकार प्रशासनिक सुधार के नाम पर अधिकारियों की कमी को छिपाने का प्रयास कर रही है। उनका आरोप है कि राज्य में पहले से ही म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र सहित कई जरूरी सरकारी सेवाओं के मामलों के निस्तारण में महीनों लग जाते हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी को बीडीओ और सीओ दोनों की जिम्मेदारी सौंपने से आम लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि विकास और राजस्व जैसे दो महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व एक ही अधिकारी के पास होने से कामकाज प्रभावित होगा। इससे फाइलों का निष्पादन धीमा पड़ेगा और प्रखंड स्तर पर भ्रष्टाचार तथा बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका है।

भाजपा नेता ने कहा कि यदि सरकार के पास अधिकारियों की कमी है तो उसका समाधान पदों का विलय करना नहीं, बल्कि रिक्त पदों पर नियुक्तियां करना होना चाहिए। इससे एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी तो दूसरी ओर राज्य के शिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

रणधीर सिंह ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह व्यवस्था न तो प्रशासनिक दृष्टि से व्यावहारिक है और न ही जनहित में।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया है कि 12 से कम पंचायत वाले 107 प्रखंडों और अंचलों में बीडीओ और सीओ के अलग-अलग पद नहीं होंगे।

इसके तहत 53 अंचलों में अंचल अधिकारी (सीओ) को बीडीओ का अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा, जबकि 54 प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अंचल अधिकारी (सीओ) का कार्य भी देखेंगे। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से छोटे प्रखंडों में उपलब्ध मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। वहीं, विपक्ष इसे प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला फैसला बता रहा है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एएसएच

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