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झारखंड के 100 सीएचसी होंगे हाईटेक, 24 घंटे इलाज के लिए 600 नए डॉक्टरों के पद सृजित करने की तैयारी

झारखंड के 100 सीएचसी होंगे हाईटेक, 24 घंटे इलाज के लिए 600 नए डॉक्टरों के पद सृजित करने की तैयारी
झारखंड के 100 सीएचसी होंगे हाईटेक, 24 घंटे इलाज के लिए 600 नए डॉक्टरों के पद सृजित करने की तैयारी

रांची, 25 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड में ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करीब 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। इन केंद्रों पर 24 घंटे इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करीब 600 नए डॉक्टरों और बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत होगी। इसके लिए राज्य के जिला अस्पतालों से लेकर सीएचसी तक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के पदों का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ बैठक कर इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव 10 दिनों के भीतर भेजने का निर्देश दिया। सरकार की योजना प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक सीएचसी को बेहतर सुविधाओं से लैस करने की है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अपग्रेड किए जाने वाले सीएचसी में मरीजों की जरूरत के मुताबिक डॉक्टर, नर्स, तकनीकी और पैरामेडिकल कर्मियों के पद सृजित किए जाएंगे। इसके लिए पुराने या अनुपयोगी पदों का भी पुनर्गठन किया जाएगा। जरूरत के अनुसार नए पद बनाए जाएंगे, ताकि इन केंद्रों पर 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। रांची जिले के बुंडू, नामकुम, सिल्ली, रातू, कांके और मांडर के सीएचसी को भी इस योजना के तहत विकसित करने की तैयारी है।

वहीं, सड़क हादसों में घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के लिए तोपचांची, बरही, निरसा, हंसडीहा, बुंडू और चैनपुर के स्वास्थ्य केंद्रों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। बैठक में 30 और 50 बेड वाले प्रस्तावित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) केंद्रों तथा 100 बेड वाले जिला अस्पतालों के लिए आवश्यक मानव संसाधन की भी समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सीएचसी स्तर पर ही जांच, डॉक्टर, दवाइयां और जरूरी इलाज की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे समय पर इलाज मिलने के साथ मरीजों और उनके परिवारों के आने-जाने तथा इलाज पर होने वाला खर्च भी कम हो सकेगा।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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