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झारखंड का ट्रेजरी घोटाला पशुपालन घोटाले से भी बड़ा, मुख्यमंत्री कराएं सीबीआई जांचः आदित्य साहू

रांची, 11 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने राज्य में उजागर हुए ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में दावा किया कि झारखंड का यह कोषागार घोटाला तत्कालीन संयुक्त बिहार के चर्चित पशुपालन घोटाले से भी अधिक व्यापक और गंभीर प्रतीत हो रहा है।
झारखंड का ट्रेजरी घोटाला पशुपालन घोटाले से भी बड़ा, मुख्यमंत्री कराएं सीबीआई जांचः आदित्य साहू

रांची, 11 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने राज्य में उजागर हुए ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में दावा किया कि झारखंड का यह कोषागार घोटाला तत्कालीन संयुक्त बिहार के चर्चित पशुपालन घोटाले से भी अधिक व्यापक और गंभीर प्रतीत हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान जांच प्रक्रिया केवल खानापूर्ति और 'आईवॉश' प्रतीत हो रही है। ऐसे में पूरे मामले की जांच तत्काल सीबीआई को सौंपे जाने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में तीखा आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की इस अवैध निकासी को अंजाम देने के पीछे सिस्टम और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों का संरक्षण शामिल है।

उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ छोटे कर्मचारियों या होमगार्ड जवानों का काम नहीं हो सकता बल्कि एक सुनियोजित नेक्सस के माध्यम से सरकारी खजाने में डाका डाला गया है। साहू ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि घोटाले को सामने आए एक महीना बीत चुका है लेकिन अब तक की गई कार्रवाई केवल संदेह पैदा करती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किन-किन जिलों से कुल कितनी राशि की अवैध निकासी हुई है और महालेखाकार ने किन विशिष्ट गड़बड़ियों को चिन्हित किया है। साहू ने मुख्यमंत्री के समक्ष पांच सवाल रखते हुए पूछा है कि जब रांची, चाईबासा और पलामू जैसे जिलों में भी करोड़ों की अवैध निकासी हुई, तो सीआईडी की एसआईटी जांच को केवल बोकारो और हजारीबाग तक ही सीमित क्यों रखा गया है।

उन्होंने डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए उपयोग होने वाले ई-कुबेर पोर्टल की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए और पूछा कि मास्टर डेटा बेस में छेड़छाड़ की भनक विभागीय अधिकारियों और निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (डीडीओ) को क्यों नहीं लगी। पत्र में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि ट्रेजरी कोड के तहत नियमित निरीक्षण और ऑडिट की जो व्यवस्था है, वह पिछले छह वर्षों में कितनी प्रभावी रही।

साहू ने कहा कि जिन पदों पर वित्तीय निगरानी की जिम्मेदारी थी, वही आज शक के घेरे में हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि पैसा राज्य की जनता का है और सरकार केवल जांच का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह घोटाला झारखंड राज्य की छवि पर एक गहरा कलंक है और बिना सीबीआई जांच के असली दोषियों को बेनकाब करना मुमकिन नहीं लगता।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम

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