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झारखंड का दिव्य और शांत स्थल, जहां बदलते मौसम में दिखते हैं प्रकृति के कई रंग, माता सीता से जुड़ी है मान्यता

रांची, 3 मई (आईएएनएस)। झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल खजाना सीता प्रपात है। रांची से कुछ दूरी पर स्थित घने जंगलों में बसा यह झरना न सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, बल्कि माता सीता से जुड़ी पौराणिक मान्यता के कारण भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
झारखंड का दिव्य और शांत स्थल, जहां बदलते मौसम में दिखते हैं प्रकृति के कई रंग, माता सीता से जुड़ी है मान्यता

रांची, 3 मई (आईएएनएस)। झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल खजाना सीता प्रपात है। रांची से कुछ दूरी पर स्थित घने जंगलों में बसा यह झरना न सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, बल्कि माता सीता से जुड़ी पौराणिक मान्यता के कारण भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

कोइना नदी के स्वच्छ जल से बना यह प्रपात लगभग 35 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरता है। चारों तरफ हरी-भरी वनस्पति से घिरा यह स्थान शांति और दिव्यता का अनुभव कराता है। इस जलप्रपात को धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है, जिसके अनुसार, रामायण काल में माता सीता ने वनवास के दौरान यहां के पानी को अपनी उपस्थिति से पवित्र किया था, ऐसी लोक मान्यता है। इस वजह से इसे सीता प्रपात या सीता फॉल्स के नाम से जाना जाता है।

यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, गिरते पानी की ध्वनि मन को सुकून व ठंडी बूंदों की फुहार गर्मी से राहत पहुंचाती है। झरने के नीचे बना प्राकृतिक जलाशय पर्यटकों को तैरने और पानी में खेलने की बेहतरीन जगह है। साफ और ठंडे पानी में डुबकी लगाने के बाद मन और शरीर दोनों तरोताजा हो जाते हैं।

खास बात है कि सीता प्रपात तक पहुंचने के लिए करीब 2 किलोमीटर लंबी ट्रेकिंग करनी पड़ती है। सारंडा जंगल के घने वृक्षों के बीच से गुजरते हुए रास्ते पर हर कदम पर नई सुंदरता दिखती है। जंगल की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और हवा में फैली ताजगी पूरे सफर को यादगार बना देती है। ट्रेकिंग और रॉक क्लाइंबिंग के शौकीन लोग यहां का आनंद उठा सकते हैं। मानसून में जब तेज बारिश होती है, तब सीता प्रपात का रूप पूरी तरह बदल जाता है। पानी की तेज धार गर्जना करती हुई गिरती है और चारों तरफ प्रकृति की खूबसूरती फैल जाती है। सफेद झाग और तेज बहाव देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

वहीं, सूखे मौसम में पानी की धार धीमी हो जाती है, लेकिन शांति बनी रहती है। पर्यटक तब झरने के नीचे शांत जलाशय में बैठकर प्रकृति की गोद में आराम कर सकते हैं। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मौसम के साथ अपना रंग बदलती रहती है। चट्टानों पर सदियों से बहते पानी ने सुंदर नक्काशी बना दी है। बीच-बीच में उगे हरे-भरे पौधे और फूल इस दृश्य को और आकर्षक बना देते हैं।

सीता प्रपात सिर्फ झरना नहीं, बल्कि वन्यजीवों का सुरक्षित घर भी है। यहां दुर्लभ बार्किंग डियर, माउस डियर और बड़ी गिलहरी जैसी प्रजातियों को देखने का मौका मिल सकता है। जंगल की यह विविधता यहां बखूबी देखने को मिलती है। स्थानीय गाइड की मदद से पर्यटक इस जगह के बारे में विस्तार से जान सकते हैं। गाइड न सिर्फ रास्ता दिखाते हैं, बल्कि स्थानीय कहानियां और रोचक तथ्य भी बताते हैं।

झारखंड घूमने वाले पर्यटकों के लिए सीता प्रपात एक छिपा हुआ हीरा है। यहां आकर व्यक्ति प्रकृति से जुड़ाव महसूस करता है और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर शांति पाता है। चाहे मानसून हो या गर्मियां, यह प्रपात हर मौसम में अपनी अलग खूबसूरती दिखाता है। जो लोग शांति, साहस और प्राकृतिक सौंदर्य की तलाश में हैं, उनके लिए सीता प्रपात बेहतरीन जगह है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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