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झारखंडः जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने निकाली तिरंगा यात्रा, फैसला वापस लेने की मांग

झारखंडः जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने निकाली तिरंगा यात्रा, फैसला वापस लेने की मांग
झारखंडः जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने निकाली तिरंगा यात्रा, फैसला वापस लेने की मांग

रांची, 20 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के जरिए की गई नियुक्तियां रद्द किए जाने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। नियुक्ति गंवाने वाले सैकड़ों अभ्यर्थियों ने गुरुवार को रांची में तिरंगा यात्रा निकालकर सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा रद्द करने का निर्णय वापस लेने की मांग की। तिरंगा यात्रा गुरुवार शाम करीब छह बजे मोरहाबादी मैदान से शुरू हुई। अभ्यर्थी तिरंगा लेकर नारेबाजी करते हुए अल्बर्ट एक्का चौक की ओर बढ़े।

यात्रा के दौरान अभ्यर्थियों ने कहा कि वे किसी दोषी को बचाने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि बिना व्यक्तिगत जांच के हजारों चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की निर्धारित प्रक्रिया में शामिल होकर सफलता हासिल की थी।

कई चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद सरकारी विभागों में योगदान भी दे चुके थे। ऐसे में पूरी परीक्षा को रद्द किए जाने से उनके सामने एक बार फिर बेरोजगारी की स्थिति पैदा हो गई है। अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन पूरी परीक्षा रद्द कर सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दंडित करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से जेएसएससी-सीजीएल समेत कई नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार ने यह निर्णय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया है। इसके बाद जेएसएससी-सीजीएल में चयनित 1,975 अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।

अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने केवल नौकरी का संकट नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, उम्र और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। कई अभ्यर्थियों ने दूसरी नौकरियां छोड़कर चयन के बाद संबंधित पदों पर योगदान दिया था। अब नियुक्ति रद्द होने से वे फिर से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की स्थिति में पहुंच गए हैं।

आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। वे अपने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा और नियुक्तियों में जहां वास्तविक गड़बड़ी हुई है, वहां दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए और निष्पक्ष अभ्यर्थियों को राहत दी जाए।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने का मामला झारखंड हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। सफल और नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अदालत ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक भी लगाई है। जेएसएससी-सीजीएल से जुड़े मामले में भी याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एएसएच

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