झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग, भाजपा सांसदों ने संसद भवन के बाहर किया प्रदर्शन
नई दिल्ली/रांची, 29 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड में कथित पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर भाजपा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा ने पिछले छह वर्षों के दौरान राज्य में हुई सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। इसी मांग को लेकर झारखंड भाजपा के सांसदों ने बुधवार को संसद भवन के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में भाजपा सांसदों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य की गठबंधन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नेताओं के हाथों में सरकार विरोधी तख्तियां थीं, जिनमें भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। प्रदर्शन में राज्यसभा सांसद और झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, सांसद निशिकांत दुबे, बीडी राम, विद्युत वरण महतो, डॉ. प्रदीप वर्मा, कालीचरण सिंह, ढुल्लू महतो और मनीष जायसवाल सहित कई नेता शामिल हुए।
भाजपा सांसद आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी दिल्ली में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर आंदोलन करती है लेकिन झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरा रवैया बताया।
साहू ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी)-सीजीएल समेत कई परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं लेकिन राज्य सरकार इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है।
आदित्य साहू ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान 19 अभ्यर्थियों की मौत हुई, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस मामले पर कोई आवाज नहीं उठाई। उन्होंने राज्य सरकार से मृतक अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से झारखंड आकर छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे झारखंड सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए।
केंद्रीय राज्यमंत्री संजय सेठ ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र जनता और जनता के प्रति जवाबदेही के सिद्धांत पर चलता है, लेकिन विपक्षी नेता इन मुद्दों पर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इंतजार कर रही है कि राहुल गांधी झारखंड में मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करें और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करें।
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी जैसी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आए हैं। उन्होंने परीक्षा एजेंसी को लेकर भी सवाल उठाए गए और कहा कि जिस एजेंसी पर पहले सवाल उठ चुके थे, उसे दोबारा परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने दावा किया कि राज्य में ऐसी स्थिति बन गई है जहां सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं के बीच अविश्वास पैदा हो रहा है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सरकार पर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब तक केवल सीआईडी जांच हुई है और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। दुबे ने आरोप लगाया कि झामुमो इस पूरे मामले को दबाना चाहती है और कांग्रेस में झारखंड जाकर युवाओं के मुद्दे उठाने का साहस नहीं है।
--आईएएनएस
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