Samachar Nama
×

सीबीआई का एक्शन, जेनसोल इंजीनियरिंग, जेनसोल ईवी लीज और प्रमोटरों के खिलाफ एफआईआर

सीबीआई का एक्शन, जेनसोल इंजीनियरिंग, जेनसोल ईवी लीज और प्रमोटरों के खिलाफ एफआईआर
सीबीआई का एक्शन, जेनसोल इंजीनियरिंग, जेनसोल ईवी लीज और प्रमोटरों के खिलाफ एफआईआर

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड, जेनसोल ईवी लीज लिमिटेड, उनके प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित तौर पर लोन की रकम के डायवर्जन और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर सीबीआई की एंटी-करप्शन ब्रांच, नई दिल्ली ने दर्ज की है।

सीबीआई की ओर से यह मामला इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (आईआरईडीए) की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 61(2) के साथ 318(ए), 336(3) और 340(2) के तहत अपराध किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर 31 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।

एफआईआर के मुताबिक, आईआरईडीए की ओर से कराए गए फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट 20 जनवरी को पेश की गई थी। ऑडिट में कर्ज लेने वाली कंपनियों, उनके प्रमोटरों और अन्य संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कथित तौर पर कई अनियमितताएं और रकम के दुरुपयोग के मामले सामने आए।

शिकायत के अनुसार, आईआरईडीए ने जेनसोल इंजीनियरिंग को 3,000 इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 267.79 करोड़ रुपए का लोन मंजूर किया था। हालांकि, फोरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि इनमें से केवल 1,549 वाहनों को ही वास्तव में कैपिटलाइज किया गया था। इन वाहनों की वास्तविक खरीद कीमत करीब 191.65 करोड़ रुपए आंकी गई।

ऑडिट में खरीद से संबंधित इनवॉइस, सीएसटी रिकॉर्ड, बीमा और वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। शिकायत में आरोप है कि इन विसंगतियों से फर्जी या जाली इनवॉइस, काल्पनिक अथवा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई खरीद और लोन की रकम को डायवर्ट या गबन किए जाने की आशंका सामने आती है।

आईआरईडीए की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों केयर रेटिंग्स और आईसीआरए को कथित तौर पर आईआरईडीए की ओर से जारी किए गए फर्जी पत्र सौंपे गए। आईआरईडीए ने स्पष्ट किया कि ये पत्र उसके अधिकारियों ने जारी नहीं किए थे। इसके साथ ही हस्ताक्षर सत्यापन विशेषज्ञ ने भी संबंधित पत्र पर किए गए हस्ताक्षर को फर्जी बताया।

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि महाजेनको से प्राप्त 137.40 करोड़ रुपए की रकम निर्धारित ट्रस्ट और रिटेंशन अकाउंट (टीआरए) के जरिए नहीं भेजी गई, बल्कि इसे गैर-परियोजना कार्यों और संबंधित पक्षों को भुगतान में इस्तेमाल किया गया।

आईआरईडीए के अनुसार, 30 जून 2026 तक जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड पर 453.77 करोड़ रुपए और जेनसोल ईवी लीज लिमिटेड पर 218.97 करोड़ रुपए की मूलधन राशि बकाया थी। इसमें ब्याज और अन्य लागू शुल्क शामिल नहीं हैं। मामले की जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस चंदन कुमार सिंह को सौंपी गई है। वहीं, सीबीआई की ओर से मामले को लेकर आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी

Share this story

Tags