जीवन भर सीखते रहो, विकसित भारत के लिए नवाचार और सामाजिक सरोकार अपनाएं: राज्यपाल आनंदीबेन
लखनऊ, 21 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन भर सीखते रहना, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने युवाओं से नई तकनीकों को अपनाने, नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ने तथा पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने वर्चुअल माध्यम से मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर कुल 22,315 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 7,582 छात्र और 14,733 छात्राएं शामिल हैं। समारोह के दौरान सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के लिए कुल 700 आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। साथ ही संबंधित जनपदों में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 900 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया।
आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि 'माई भारत' पोर्टल के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने नियमित योग, व्यायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाने पर बल देते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान, मासिक धर्म स्वच्छता और अन्य जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को शोध, नवाचार और स्वदेशी तकनीक के विकास के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने हाल में युवाओं द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रह का उल्लेख करते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय की सामाजिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रभावी निर्वहन किया है। विश्वविद्यालय द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से आंगनबाड़ी किट वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, रक्तदान, टीबी मुक्त भारत अभियान, नशा मुक्ति अभियान, महिला स्वास्थ्य जागरूकता, मासिक धर्म कप वितरण, वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पहल पर प्रदेश में अब तक 67,643 आंगनबाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं।
पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए राज्यपाल ने प्रत्येक नागरिक से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने, जल संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने तथा स्वावलंबी बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने माता-पिता का सम्मान करें और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें तो देश में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता भी कम हो जाएगी। राज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में विद्यार्थियों को 'जीवन भर सीखते रहो' का संदेश देते हुए कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे और स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण तथा नवाचार के क्षेत्र में योगदान दे तो विकसित और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य शीघ्र हासिल किया जा सकता है।
समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। साथ ही दीक्षोत्सव की दिग्दर्शिका, भाषण संकलन और चयनित पेंटिंग्स के संकलन का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। वहीं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों से एआई, मशीन लर्निंग और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की।
--आईएएनएस
विकेटी/डीकेपी

