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इतिहास बन गया जंतर-मंतर! 33 साल पुरानी परंपरा पर विराम, जानिए इस ऐतिहासिक प्रोटेस्ट वेन्यू का पूरा सफर

इतिहास बन गया जंतर-मंतर! 33 साल पुरानी परंपरा पर विराम, जानिए इस ऐतिहासिक प्रोटेस्ट वेन्यू का पूरा सफर

दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देशभर के आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा। दिल्ली पुलिस ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इसकी जगह अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। यह फैसला गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।

क्यों हटाया गया जंतर-मंतर का नाम?

दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन किया गया है। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाके में स्थित है और संसद के भी काफी नजदीक है। यहां बड़े प्रदर्शन होने पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन चुनौती बन सकते हैं।हालांकि, जंतर-मंतर को सूची से हटाने की आधिकारिक वजहों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। नए प्रदर्शन स्थलों पर लागू होने वाले नियमों और अनुमति की प्रक्रिया के लिए अलग से संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी की जाएगी।

अब कहां होंगे धरना-प्रदर्शन?

दिल्ली में प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए गए हैं:

  • रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली के नजदीक स्थित प्रमुख मैदान।

  • बुराड़ी ग्राउंड: उत्तरी दिल्ली की ओर स्थित मैदान।

  • CBD ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली में निर्धारित नया प्रदर्शन स्थल।

इन जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति और अन्य शर्तों से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना बाकी हैं।

CJP के प्रदर्शन के बीच आया फैसला

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। CJP ने SIR पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।

हाल के दिनों में दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कई स्थानों पर यातायात व सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। ऐसे माहौल में प्रदर्शन स्थलों में बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।जंतर-मंतर का सफर: ऐतिहासिक वेधशाला से आंदोलन के केंद्र तकजंतर-मंतर का इतिहास केवल विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है। इसका निर्माण 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने खगोलीय गणनाओं के लिए करवाया था। यहां मौजूद यंत्रों से समय, सूर्य की गति और खगोलीय स्थितियों का अध्ययन किया जाता था।

बाद के वर्षों में दिल्ली का जंतर-मंतर सामाजिक आंदोलनों, राजनीतिक विरोध और जनहित से जुड़े अभियानों की प्रमुख जगह बन गया। यहां विभिन्न मुद्दों पर नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने अपनी आवाज उठाई।अब इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।

क्या अब जंतर-मंतर पर कभी प्रदर्शन नहीं होंगे?

फिलहाल स्पष्ट बात यह है कि जंतर-मंतर को निर्धारित आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि देश में शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार समाप्त हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार है, हालांकि इस पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।अब सवाल यह है कि नई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को कितनी सुविधाएं मिलेंगी, अनुमति की प्रक्रिया कितनी आसान होगी और क्या वे अपनी मांगें सरकार तक पहले की तरह प्रभावी ढंग से पहुंचा पाएंगे?दिल्ली पुलिस की संशोधित SOP आने के बाद इन सवालों पर तस्वीर और साफ होगी।

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