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जनता के लिए शासन ही असली लोकतंत्र: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भारतीय गणराज्य की असली ताकत इसी में है कि शासन आम नागरिकों के लिए काम करे। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर लिखे अपने एक लेख में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र सिर्फ संविधान और चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सफल होता है जब उसका फायदा देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।
जनता के लिए शासन ही असली लोकतंत्र: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भारतीय गणराज्य की असली ताकत इसी में है कि शासन आम नागरिकों के लिए काम करे। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर लिखे अपने एक लेख में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र सिर्फ संविधान और चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सफल होता है जब उसका फायदा देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।

राजनाथ सिंह ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1952 के भाषण को याद करते हुए कहा कि आजादी और संविधान मिलना मंजिल नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत थी। उनका कहना था कि देश का असली काम लोगों की मुश्किलों को कम करना और उनके जीवन में खुशहाली लाना है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ ‘जनता का’ और ‘जनता द्वारा’ शासन नहीं, बल्कि सबसे अहम है ‘जनता के लिए’ शासन। यानी सरकार का हर फैसला आम नागरिकों के भले के लिए होना चाहिए, खासकर गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के लिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की असली परीक्षा यह है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। सिर्फ नियम-कानून बना देना काफी नहीं है, जरूरी यह है कि सरकार जमीन पर लोगों की जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा कर पाती है। उन्होंने भारतीय परंपरा का जिक्र करते हुए योग-क्षेम, गांधीजी के सर्वोदय और दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को जन-केंद्रित सोच का आधार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' इसी सोच की आज की शक्ल है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने नीतियों को सीधे आम आदमी के जीवन से जोड़ा है। श्रम कानूनों में सुधार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण, और सामाजिक न्याय पर जोर इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 17 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं। दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों को भी उन्होंने सम्मान और बराबरी की दिशा में बड़ा कदम बताया।

रक्षा मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन पर बात करते हुए कहा कि यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं रहा, बल्कि लोगों की भागीदारी से जुड़ा एक जन-आंदोलन बना, जिसने स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, मुद्रा योजना और कौशल भारत मिशन का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान दिया है।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से लोकतंत्र और मजबूत होगा और महिलाओं की आवाज नीति-निर्माण में और अधिक असरदार बनेगी। अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय गणराज्य कोई एक बार पूरा हो जाने वाला काम नहीं है। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को जमीनी हकीकत से जोड़े। आज देश में शासन के केंद्र में आम नागरिक हैं और भारत सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी

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