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देश की जनता ने नकारा तो कांग्रेस ने संस्थाओं पर उठाने शुरू किए सवाल : नितिन नवीन

देश की जनता ने नकारा तो कांग्रेस ने संस्थाओं पर उठाने शुरू किए सवाल : नितिन नवीन
देश की जनता ने नकारा तो कांग्रेस ने संस्थाओं पर उठाने शुरू किए सवाल : नितिन नवीन

नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को आईएएनएस के साथ देश और राजनीति से जुड़े कई विषयों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस द्वारा फैलाई जा रही अराजकता और रिजीम चेंज के नारे पर भी बात की।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि राहुल गांधी के पास एक रिमोट कंट्रोल है, जब वो चाहेंगे, 40 लाख लोग देश में अराजकता फैलाने के लिए तैयार खड़े हैं। मेरा ये मानना है कि ये बातें हम पहले से उठा रहे थे कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाने और देश को अस्थिर करने के लिए एक टूलकिट के रूप में यूज हो रहे हैं, आज जब कांग्रेस के नेता ही ये सब कह रहे हैं। इससे पता चलता है कि हमारी बातें सही साबित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को शायद ये अंदाजा नहीं हैं कि हमारा देश बाकी देशों से बिल्कुल भिन्न हैं। भारत की लोकतंत्र की जड़ें बहुत भीतर तक मजबूत हैं, इसे नापाक सोच और विदेशी टूलकिट में शामिल लोग अस्थिर नहीं कर सकते। देश का लोकतंत्र इतना मजबूत है कि अराजकता और शहरी नक्सलवादी सोच के लोगों के जवाब देना जानता है।

राहुल गांधी को विदेशी टूलकिट बताते हुए नितिन नवीन ने कहा कि हम लोग शुरू कर रहे हैं कि लोकतंत्र के कुछ पैमाने होते हैं। हर फोरम पर अपनी बात रखने के कुछ तरीके होते हैं। नेता प्रतिपक्ष हैं तो सदन में आइए, सदन में अपनी बात रखिए। सड़क पर भी आप संघर्ष करते हैं तो उसकी भी एक मर्यादा है। हमने भी सड़कों पर संघर्ष किया है। हमने सदन में भी संघर्ष किया है। हमारा तो इतिहास ही संघर्ष से जुड़ा है, लेकिन राहुल गांधी संघर्ष करके तो आए नहीं हैं, उन्होंने इस देश के लोकतंत्र को अपने परिवार का राजतंत्र समझ लिया है। ये देश की जनता देख रही है।

उन्होंने कहा कि हम टूलकिट की बात इसलिए करते हैं कि जब आपको (कांग्रेस) को देश की जनता ने नकार दिया है, आप एक के बात एक चुनाव हारते चले गए तो अब आप देश के सभी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। पहले ईवीएम और अब एसआईआर पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि खुद कांग्रेस के समय भी एसआईआर हो चुका है। एसआईआर केवल देश की वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने की एक प्रक्रिया है। जो लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं, क्या ऐसे लोगों का नाम वोटर लिस्ट में रहने दिया जाए?

--आईएएनएस

एमएस/वीसी

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