देशभर में आज जन्माष्टमी की धूम, आधी रात को होगा कान्हा का जन्मोत्सव; जानें पूजा का शुभ समय
देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन, द्वारका, पुरी समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और दिनभर भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का सबसे खास आकर्षण आधी रात को होने वाला कान्हा का जन्मोत्सव है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी पर रात के समय विशेष पूजा और जन्मोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
सूर्योदय से रात तक अष्टमी तिथि
इस बार अष्टमी तिथि सूर्योदय से लेकर रात तक रहने के कारण देश के ज्यादातर कृष्ण मंदिरों में आज ही जन्माष्टमी मनाई जा रही है। भक्त सुबह से ही व्रत, पूजा और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन में जुटे हैं।मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और जीवन से जुड़ा माना जाता है। यहां मंदिरों में विशेष श्रृंगार, झांकियां और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
रात 12 बजे से 12:48 बजे तक खास समय
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सबसे प्रतीक्षित समय रात में आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात के आठवें मुहूर्त में हुआ था।इस बार यह विशेष समय 4-5 सितंबर की मध्यरात्रि 12:00 बजे से 12:48 बजे तक बताया गया है। इसी दौरान मंदिरों में भगवान के जन्म की प्रतीकात्मक रस्में पूरी की जाएंगी। शंख और घंटियों की गूंज के बीच बाल गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा।कई जगहों पर आधी रात के बाद भगवान को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद नए वस्त्र पहनाकर उन्हें झूले में विराजमान किया जाता है। भक्त ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे भजनों के साथ जन्मोत्सव मनाते हैं।
रात में पूजा नहीं कर पाएं तो क्या करें?
हर भक्त के लिए आधी रात तक जागना संभव नहीं होता। ऐसे में दिन में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अवसर है।बताए गए धार्मिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि के दौरान दिन में किसी भी समय श्रीकृष्ण की पूजा की जा सकती है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार भगवान का पूजन, ध्यान और भजन कर सकते हैं।व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का पालन करते हैं। घरों में भी बाल गोपाल का श्रृंगार कर उन्हें झूले में बैठाया जाता है और मक्खन-मिश्री, फल व अन्य भोग अर्पित किए जाते हैं।
मंदिरों में दिखेगा भक्ति का अद्भुत नजारा
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। कहीं फूलों से सजावट की गई है तो कहीं कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां तैयार की गई हैं।रात होते-होते भक्तों का उत्साह और बढ़ेगा और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के साथ मंदिरों में उत्सव चरम पर पहुंचेगा।

