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जंगीपुर विधानसभा: क्या टूटेगा गैर-मुस्लिम जीत का लंबा सिलसिला? वापसी का रास्ता तलाश रही कांग्रेस

कोलकाता, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और तृणमूल कांग्रेस की पकड़ ने जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत को भी दिलचस्प बना दिया है। टीएमसी सीट को बरकरार रखने की पूरी कोशिश में जुटी है तो कांग्रेस वापसी का रास्ता तलाश रही है।
जंगीपुर विधानसभा: क्या टूटेगा गैर-मुस्लिम जीत का लंबा सिलसिला? वापसी का रास्ता तलाश रही कांग्रेस

कोलकाता, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और तृणमूल कांग्रेस की पकड़ ने जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत को भी दिलचस्प बना दिया है। टीएमसी सीट को बरकरार रखने की पूरी कोशिश में जुटी है तो कांग्रेस वापसी का रास्ता तलाश रही है।

इसी बीच भाजपा यहां अपनी पहली जीत ढूंढ रही है। इन सबके बीच अहम बात यह है कि जंगीपुर विधानसभा में शुरुआत के दो चुनाव (1957 और 1962) हिंदू प्रत्याशियों ने जीते थे, लेकिन उसके बाद से इस सीट पर कोई भी गैर-मुस्लिम जीत हासिल नहीं कर पाया।

वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के जाकिर हुसैन जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुजीत दास को 92 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।

जंगीपुर, पश्चिम बंगाल राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है। यह जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। परिसीमन आयोग के आदेशों के अनुसार, क्रमांक 58 जंगीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में जंगीपुर नगरपालिका, रघुनाथगंज प्रथम सामुदायिक विकास खंड और सूती प्रथम सामुदायिक विकास खंड की अहीरन और बंसबाती ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

जंगीपुर उप-संभागीय मुख्यालय होने के साथ-साथ भागीरथी नदी के तट पर बसा एक महत्वपूर्ण नगर है। यहां स्थित लगभग एक किलोमीटर लंबा जंगीपुर बैराज गंगा नदी और भागीरथी के बीच जल प्रवाह को नियंत्रित करता है। यह इलाका ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से भी अहम है, क्योंकि यहां 2,100 मेगावॉट क्षमता वाला फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशन और 1,600 मेगावॉट का सागरदिघी थर्मल पावर स्टेशन स्थित है, जो राज्य की बिजली आपूर्ति में बड़ा योगदान देते हैं।

जंगीपुर की अर्थव्यवस्था मुख्यतः बीड़ी उद्योग, लघु विनिर्माण इकाइयों और सीमापार व्यापार पर आधारित है। बांग्लादेश सीमा के निकट होने से जंगीपुर का भू-राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

राजनीतिक इतिहास की बात करें तो 1957 में स्थापित इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक 16 चुनाव हो चुके हैं। यहां कांग्रेस ने आठ बार जीत हासिल की है, जबकि क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) को चार बार सफलता मिली है। निर्दलीय उम्मीदवारों और तृणमूल कांग्रेस ने दो-दो बार यहां विजय दर्ज की है।

--आईएएनएस

डीसीएच/वीसी

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