'जानबूझकर अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा,' नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर बोले दिलीप घोष
कोलकाता, 31 जुलाई (आईएएनएस)। नीट समेत विभिन्न पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने की मांग लगातार जारी है। कई जगहों पर छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस ले लिया गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो कानून अपना काम करेगा।
दिलीप घोष ने कहा, "सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है और कोर्ट ने भी कहा है कि 18 साल से कम उम्र के लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो कानून अपना काम करेगा। सरकार ने बार-बार कहा है कि छात्रों का हित सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शांति की अपील की और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा सहित वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत की। हालांकि, जिन लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की और पुलिस पर हमला किया, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।"
नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "जो लोग यह मुद्दा उठा रहे हैं, वे वही लोग हैं जिनकी सरकारों के दौरान पेपर लीक हुए थे। कांग्रेस सरकार के दौरान, राज्यों और केंद्र दोनों में, कई बार पेपर लीक हुए। फिर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा क्यों मांगा गया? पश्चिम बंगाल में कितनी बार पेपर लीक हुए हैं? क्या कोई जांच या विरोध प्रदर्शन हुआ? अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। अगर जरूरत पड़ी तो हम जांच करेंगे और सब कुछ सामने लाएंगे।"
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "पंजाब में, जहां अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री भगवंत मान के जरिए सरकार चलाते हैं, वहां तीन बार प्रश्न पत्र लीक हुए, लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं करता। जिन लोगों ने सबसे ज्यादा हंगामा किया, वे अब भावुक बयान दे रहे हैं। सभी को जवाबदेह ठहराया जा रहा है। अब उन वरिष्ठ नेताओं की बारी है जिन्होंने यह सब भड़काया - उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।"
वहीं, लेखिका तस्लीमा नसरीन के कोलकाता दौरे पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "दुनिया भर से लोग 'सिटी ऑफ जॉय' कोलकाता आते हैं। टीएमसी और सीपीएम के शासन में खुलेपन की परंपरा बाधित हुई थी, जब केवल उन्हीं चुनिंदा लोगों को आने की अनुमति थी जो उनका समर्थन करते थे। आज, एक लोकतांत्रिक सरकार है। अगर कोई यहां कोई कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है तो वे उचित प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई आपत्ति नहीं है, तो सरकार अनुमति दे देगी।"
-- आईएएनएस
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