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जनता के जनादेश का अपमान करना कांग्रेस का पुराना चरित्र है: शिवराज सिंह चौहान

जनता के जनादेश का अपमान करना कांग्रेस का पुराना चरित्र है: शिवराज सिंह चौहान
जनता के जनादेश का अपमान करना कांग्रेस का पुराना चरित्र है: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ‘अवैध’ बताना संवैधानिक संस्थाओं और जनादेश का अपमान है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया बयान उनकी हताशा, पराजय की मानसिकता और संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार करने की पुरानी परिपाटी का एक और प्रमाण है। जब-जब देश की जनता कांग्रेस को चुनावों में नकारती है, तब-तब कांग्रेस लोकतंत्र, चुनाव आयोग, ईवीएम और देश के जनादेश को बदनाम करने की साजिश रचने लगती है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रधानमंत्री को देश की जनता ने पूर्ण बहुमत और रिकॉर्ड जनादेश के साथ चुना है, उनके खिलाफ बोलना कांग्रेस के अहंकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसके अविश्वास को दर्शाता है। क्या कांग्रेस की नजर में लोकतंत्र केवल तभी वैध होता है, जब गांधी परिवार या कांग्रेस सत्ता में हो? जहां एक लोकतांत्रिक देश में किसी सरकार का पांच साल तक चल जाना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, वहीं भारत जैसे विविधतापूर्ण और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद पर और उसके बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में जनता द्वारा ऐतिहासिक बहुमत से चुना जाना यह साबित करता है कि देश की जनता का विश्वास किस पर है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 को संसद के दोनों सदनों द्वारा पूरी तरह लोकतांत्रिक, संवैधानिक और पारदर्शी तरीके से पारित किया गया है। इसमें नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है, जिससे विपक्ष की आवाज सुनिश्चित होती है।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस शायद अपना इतिहास भूल गई है। दशकों तक कांग्रेस सरकारों ने बिना किसी कानून या पारदर्शी चयन समिति के, केवल प्रधानमंत्री कार्यालय की एक पर्ची पर मनमाने तरीके से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की और बाद में उन्हें मंत्री पद तथा सांसद का इनाम दिया। आज जब एक वैधानिक और पारदर्शी व्यवस्था बनी है तो कांग्रेस निराधार आरोप लगा रही है। मतदाता सूची को अपडेट करना, फर्जी और दोहरे नामों को हटाना तथा योग्य नागरिकों को जोड़ना चुनाव आयोग की एक सतत और वैधानिक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से दावा और आपत्ति के फॉर्म स्वीकार करता है। कांग्रेस 'गरीबों' और 'मुस्लिम अल्पसंख्यकों' के नाम पर डर और भ्रम का माहौल बनाकर अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को जिंदा रखना चाहती है। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता केवल वैध और निष्पक्ष मतदान का पक्षधर है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जीतती है, तब उसे ईवीएम पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन जब जनता कांग्रेस के भ्रष्टाचार और विभाजनकारी राजनीति को खारिज कर देती है तो हार का ठीकरा तुरंत ईवीएम पर फोड़ दिया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर अपनी मुहर लगा चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस देश को 1980 और 90 के दशक के बूथ कैप्चरिंग, मतपेटी लूटने और हिंसा वाले बैलेट पेपर के दौर में वापस धकेलना चाहती है।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस आज मुद्दों से विहीन हो चुकी है। अपनी लगातार चुनावी हारों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना, सड़कों पर अराजकता फैलाना और देश के लोकतंत्र को वैश्विक मंच पर बदनाम करना ही कांग्रेस का एजेंडा बन चुका है। जब जनादेश अपने पक्ष में होता है, तब कांग्रेस को लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा रहता है, लेकिन जनादेश उसके खिलाफ आते ही वह ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। भारतीय जनता पार्टी यह स्पष्ट करती है कि देश का लोकतंत्र बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान की नींव पर अडिग है और जनता ऐसे झूठे व आधारहीन बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से बार-बार देती रहेगी।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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