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जम्मू-कश्मीर में बिजली दरें बढ़ाने पर भड़की भाजपा, अभिजीत जसरोटिया ने उमर सरकार को घेरा

जम्मू-कश्मीर में बिजली दरें बढ़ाने पर भड़की भाजपा, अभिजीत जसरोटिया ने उमर सरकार को घेरा
जम्मू-कश्मीर में बिजली दरें बढ़ाने पर भड़की भाजपा, अभिजीत जसरोटिया ने उमर सरकार को घेरा

जम्मू, 25 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से 1 सितंबर से बिजली की नई दरें लागू किए जाने, वंधामा हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू किए जाने और पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय के दोबारा बनाए जाने की खबरों पर भाजपा प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार लोगों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं करा पाई है, तो टैरिफ बढ़ाने का क्या औचित्य है।

अभिजीत जसरोटिया ने हाथ में बल्ब दिखाते हुए बिजली व्यवस्था पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बल्ब का आविष्कार थॉमस अल्वा एडिसन ने वर्ष 1879 में किया था, लेकिन जम्मू-कश्मीर के कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों ने करीब डेढ़ सौ साल बाद पहली बार बल्ब देखा। कई गांवों में बिजली की स्थिति लंबे समय तक बेहद खराब रही। 5 अगस्त 2019 के बाद जिन इलाकों में विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम हुए, वे इससे पहले नहीं हो पाए थे। ऐसे में सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि जिन लोगों तक पर्याप्त बिजली नहीं पहुंची, उन पर नए टैरिफ का बोझ डालने का तर्क क्या है।

जसरोटिया ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चुनावी घोषणा-पत्र का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणा-पत्र में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि अब सरकार अपने पहले के वादे और मौजूदा फैसले के बीच की स्थिति को कैसे स्पष्ट करेगी। केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई है और बिजली क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के सुधार से पावर लॉस भी कम होने की उम्मीद है। ऐसे में उन्होंने सरकार से बिजली टैरिफ बढ़ाने के पीछे का स्पष्ट आधार बताने की मांग की और बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के घोषणा-पत्र और सरकार के फैसलों को लेकर जसरोटिया ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर उसके राजनीतिक इतिहास को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की गलतियों की सूची काफी लंबी है और 13 जुलाई 1931 से लेकर 1987 के चुनावों तक के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1987 के चुनावों में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) से जुड़े विवाद को भी जम्मू-कश्मीर के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जाता है। यदि नेशनल कॉन्फ्रेंस की कथित राजनीतिक गलतियों को गिनाना शुरू किया जाए तो पूरा दिन भी कम पड़ जाएगा। उन्होंने कहा आगे कि गलतियों से सीखना जरूरी है और सरकार को बार-बार ऐसे फैसले लेने से बचना चाहिए, जिनसे जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़े।

जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा 1998 के वंधामा हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू किए जाने पर भी भाजपा प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने नदीमर्ग की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें कश्मीरी हिंदुओं की हत्या हुई थी। जसरोटिया ने सवाल उठाया कि पिछली सरकारों ने इन घटनाओं के दौरान कानून-व्यवस्था और कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए थे। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस की पूर्व सरकारों के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सम्मान दिए जाने से भी गलत संदेश गया।

जसरोटिया ने कश्मीरी हिंदुओं के पलायन और उनके साथ हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर की घटनाओं के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय के दोबारा बनाए जाने की रिपोर्टों पर जसरोटिया ने पाकिस्तान की नीति पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि भारत को हजारों घाव देकर कमजोर करने की नीति पर चलने वाले पाकिस्तान से किसी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी ढांचे को संरक्षण देने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। पीओजेके में जारी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहां आम लोगों के खिलाफ दमन और हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की कथित निराशा का असर जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी हिंदुओं को धमकाने के प्रयासों के रूप में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। कश्मीरी हिंदुओं के साथ भाजपा और सुरक्षा बल पूरी तरह खड़े हैं।

--आईएएनएस

पीएसके

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