जामिया में विवादित नारों पर छात्र जसीम अली का आरोप, कहा- प्रदर्शन को बदनाम करने की साजिश
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ये नारे छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल के दौरान लिखे गए। इस मामले में भूख हड़ताल कर रहे छात्र जसीम अली ने इन नारों से दूरी बनाते हुए आरोप लगाया कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों की मुख्य मांग छात्र संघ की बहाली और चुनाव का कार्यक्रम घोषित करना है।
जसीम अली ने कहा कि छात्र इन नारों का पूरी तरह खंडन करते हैं और उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे शरारती तत्वों को रोके। इन नारों के जरिए छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म करने की कोशिश की गई है।
जसीम ने दावा किया कि यह सब पहले से तय योजना के तहत किया गया है, ताकि छात्र संघ चुनाव की मांग से ध्यान हटाया जा सके। छात्रों की मांग स्पष्ट है और वे चुनाव बहाल करने के साथ उसका शेड्यूल घोषित करने की मांग पर कायम हैं। इस मुद्दे से हटकर की जा रही दूसरी चर्चाएं बेबुनियाद हैं।
भूख हड़ताल कब तक जारी रहेगी और छात्रों की तबीयत कैसी है, इस सवाल पर जसीम अली ने कहा कि भूख हड़ताल कर रहे चारों छात्रों की तबीयत खराब है। इसके बावजूद प्रशासन के सामने रखी गई उनकी तीन शर्तें पूरी होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
जसीम अली ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों से भी अपील की कि छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग केवल कुछ छात्रों का मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव बहाल होने पर एबीवीपी के छात्र भी चुनाव लड़ सकेंगे, इसलिए इस आंदोलन को लेकर अफवाहें नहीं फैलानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो-तीन दिनों से प्रदर्शन और भूख हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें की जा रही हैं। विवादित नारों का मामला भी आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा है।
अली ने विश्वविद्यालय प्रशासन से परिसर में लगे कैमरों की जांच कराने और नारे लिखने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
--आईएएनएस
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