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जामिया की दीवारों पर देश विरोधी लिखे नारे पर भड़के भाजपा नेता प्रेम शुक्ला

जामिया की दीवारों पर देश विरोधी लिखे नारे पर भड़के भाजपा नेता प्रेम शुक्ला
जामिया की दीवारों पर देश विरोधी लिखे नारे पर भड़के भाजपा नेता प्रेम शुक्ला

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने का मामला सामने आने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने इसे देशविरोधी मानसिकता का प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और उन्हें सबक सिखाया जाएगा।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि जिस तरह से विश्वविद्यालय की दीवारों पर देश विरोधी नारे लिखे गए हैं, उससे पता चलता है कि कुछ अराजक और देशविरोधी ताकतें ऐसे शैक्षणिक संस्थानों में अपनी गतिविधियां चला रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले पर सख्त कार्रवाई करेगी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान वाले बयान पर प्रेम शुक्ला ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समय-समय पर फारूक अब्दुल्ला के भीतर का पाकिस्तान जाग जाता है और इसी वजह से वह गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं।

उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को इस तरह के बयान देने से पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति और भारत के जम्मू-कश्मीर में हुए विकास कार्यों को देखना चाहिए। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति बेहद खराब है, जबकि भारत के जम्मू-कश्मीर में विकास और निवेश के नए अवसर तैयार हुए हैं। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में लाखों करोड़ रुपए का निवेश किया है और सऊदी अरब जैसे देश भी वहां निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर पूरे गौरव के साथ तिरंगा लहरा रहा है। अनुच्छेद 370 में संशोधन के बाद जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ एकीकरण और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं को परेशानी हो रही है।

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक वीडियो में दिए गए बयान पर प्रेम शुक्ला ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को पूरी जगह मिलनी चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन असहमति के नाम पर अराजकता या देशविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लोकतंत्र में विचारों की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी आड़ में देशविरोधी गतिविधियों को संरक्षण देने की कोशिश करने वालों को यह समझना चाहिए कि ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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