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जालंधर में है भगवती को समर्पित शक्ति पीठ, यहां भी कटकर गिरा था माता सती के शरीर का एक भाग

जालंधर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर में माता दुर्गा के कई भव्य मंदिर हैं, जो भक्ति और शक्ति दोनों की गाथा कहते हैं। भगवती का ऐसा ही भव्य मंदिर पंजाब राज्य के सबसे प्राचीन कहे जाने वाले शहर जालंधर में है। खास बात है कि यह भवानी को समर्पित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।
जालंधर में है भगवती को समर्पित शक्ति पीठ, यहां भी कटकर गिरा था माता सती के शरीर का एक भाग

जालंधर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर में माता दुर्गा के कई भव्य मंदिर हैं, जो भक्ति और शक्ति दोनों की गाथा कहते हैं। भगवती का ऐसा ही भव्य मंदिर पंजाब राज्य के सबसे प्राचीन कहे जाने वाले शहर जालंधर में है। खास बात है कि यह भवानी को समर्पित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।

पंजाब के जालंधर शहर में स्थित देवी तालाब मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस पवित्र स्थल का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यहां माता सती का दाहिना स्तन गिरा था। हिंदू धर्म में इसे अत्यंत पावन और शक्तिशाली स्थान माना जाता है।

मंदिर के बारे में पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन नहीं कर पाईं तो उन्होंने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। क्रोधित भगवान शिव सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे माता सती का शरीर 51 टुकड़ों में विभक्त हो गया। इन टुकड़ों में से एक माता सती का दाहिना स्तन जालंधर में गिरा। इसी स्थान पर देवी तालाब मंदिर का निर्माण हुआ।

एक अन्य कथा के अनुसार, आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने यहां गंगा का आह्वान किया था, जिसके फलस्वरूप धरती से पवित्र जल प्रकट हुआ और यही जल आज देवी तालाब के रूप में मौजूद है। देवी तालाब मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी दुर्गा की मुख्य प्रतिमा स्थापित है। यहां एक बड़ा तालाब है, जिसमें भक्त आध्यात्मिक शुद्धि के लिए पवित्र स्नान करते हैं। मंदिर परिसर में देवी काली का प्राचीन मंदिर, भगवान शिव का मंदिर (बाघ पर विराजमान) और अमरनाथ गुफा जैसी संरचना भी बनी हुई है। मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और ऊंचा पिरामिड आकार का गुंबद इसे भव्य बनाता है।

परिसर में एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ भी है, जिस पर भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना से धागे बांधते हैं। यही नहीं मंदिर में भोजन की भी व्यवस्था मुफ्त रहती है। प्रतिदिन सुबह शाम मंदिर कमेटी की ओर से भक्तों या भोजन के इच्छुक लोगों को भोजन कराया जाता है।

देवी तालाब मंदिर जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर के केंद्र में होने के कारण यहां तक पहुंचना आसान है। जालंधर जंक्शन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या रिक्शा द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर परिसर में ठहरने की भी उत्तम व्यवस्था है। कम शुल्क में यहां गेस्ट हाउस उपलब्ध है, जहां यात्री या श्रद्धालु शर्तों के साथ ठहर सकते हैं।

देवी तालाब मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और नारी शक्ति का प्रतीक भी है। रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहां मां भगवती के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं। मंदिर में हर साल भव्य ‘कीर्तन दरबार’ और ‘हरबल्लभ संगीत सम्मेलन’ का भी आयोजन होता है। इन आयोजनों में देश भर के प्रसिद्ध भजन गायक और संगीतकार आते हैं।

मंदिर के आसपास भी कई आकर्षक जगह हैं। मंदिर से 15 किलोमीटर के दायरे में कई आकर्षण जगह हैं, जैसे 'वंडरलैंड थीम पार्क', 'सेंट मैरी कैथेड्रल चर्च', 'रंगला पंजाब हवेली' और 'जंग-ए-आजादी स्मारक' भी है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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