राजस्थान की प्रसिद्ध मिठाई घेवर, जिसे जयपुर की पहचान और शान माना जाता है, इस बार खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण प्रभावित हो गई है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के असर अब स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई देने लगे हैं।
गणगौर जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान घेवर की मांग हर साल तेजी से बढ़ती है। त्योहारों के समय जयपुर की मिठाई दुकानों पर घेवर के बिना उत्सव अधूरा माना जाता है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। कच्चे माल की आपूर्ति और बढ़ती लागत के चलते घेवर का उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत तक घट गया है।
व्यापारियों के अनुसार, युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे दूध, घी और अन्य जरूरी सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे मिठाई कारोबार पर दबाव बढ़ा है।
इसके साथ ही, ग्राहकों की खरीद क्षमता पर भी असर देखने को मिला है, जिससे बिक्री में गिरावट आई है। व्यापारी मानते हैं कि इस बार त्योहारों में भी पहले जैसी रौनक और बिक्री नहीं दिख रही है।
घेवर बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि उत्पादन कम होने के बावजूद वे गुणवत्ता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लागत और मांग के बीच संतुलन बनाना उनके लिए चुनौती बन गया है।
जयपुर के मिठाई बाजार में इस स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में भी इस तरह की समस्याएं जारी रह सकती हैं।
फिलहाल, घेवर की मिठास भले ही युद्ध के प्रभाव से फीकी पड़ती नजर आ रही हो, लेकिन इसकी पारंपरिक लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व अब भी बरकरार है।

