जयपुर एससी-एसटी कोर्ट ने पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा समेत 7 आरोपियों पर आरोप तय किए
जयपुर की एससी-एसटी कोर्ट ने पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा समेत सात आरोपियों पर हत्या के प्रयास, मारपीट, राजकार्य में बाधा और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में अभियोग (चार्ज) तय कर दिए हैं। यह फैसला जज विद्यानंद शुक्ला ने सुनाया।
जानकारी के अनुसार, यह मामला 28 मार्च 2022 का है। आरोप है कि धौलपुर के बाड़ी डिस्कॉम ऑफिस में पूर्व विधायक मलिंगा के इशारे पर उनके सहयोगियों ने AEN हर्षदापति और JEN नितिन गुलाटी के साथ मारपीट की। घटना के अगले दिन, 29 मार्च को AEN ने मलिंगा समेत अन्य के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई।
मामले की जांच और सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देश पर यह केस जयपुर ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले मामले में कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अब कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए हैं, यानी अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपियों को अदालत में अपने बचाव का मौका मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि सत्ता और पद का दुरुपयोग करके अधिकारियों पर हमला करने की घटनाओं में न्यायिक कार्रवाई सख्ती से की जाएगी। उन्होंने बताया कि एससी-एसटी कोर्ट का यह कदम उन सरकारी कर्मचारियों के लिए भी संदेश है, जो कार्य करते समय किसी प्रकार की धमकी या हिंसा का सामना करते हैं।
पूर्व विधायक मलिंगा पर आरोप है कि उन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा उत्पन्न करने की साजिश रची। इस प्रकार के मामलों में कोर्ट का यह निर्णय यह दर्शाता है कि राजनीतिक प्रभाव या पद का इस्तेमाल कानून को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
धौलपुर और जयपुर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष पेश किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की गई और अब कोर्ट के चार्ज तय होने के बाद अगली सुनवाई में मामले की विस्तृत सुनवाई होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव आम है, लेकिन कोर्ट का सक्रिय हस्तक्षेप और चार्ज तय करना यह सुनिश्चित करता है कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से भविष्य में इस तरह की घटनाओं में न्यायिक कार्रवाई का मार्ग स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, जयपुर एससी-एसटी कोर्ट का यह फैसला पूर्व विधायक मलिंगा और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगली सुनवाई में आरोपी अपनी सफाई कैसे पेश करते हैं और न्यायालय का निर्णय क्या होगा।

