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जबरन धर्मांतरण पहले से ही अपराध, कानून बनाने की जरूरत नहीं: माजिद मेमन

जबरन धर्मांतरण पहले से ही अपराध, कानून बनाने की जरूरत नहीं: माजिद मेमन
जबरन धर्मांतरण पहले से ही अपराध, कानून बनाने की जरूरत नहीं: माजिद मेमन

मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) नेता माजिद मेमन ने संसद के विशेष सत्र की चर्चाओं, महाराष्ट्र में लागू हुए धर्मांतरण विरोधी कानून, परेल-चिंचपोकली में ईद-ए-मिलादुन्नबी के दौरान हुई झड़प और चीनी की बढ़ती कीमतों समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक मुद्दों के बजाय जनता से जुड़े सवालों पर ध्यान देना चाहिए।

संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चाओं पर माजिद मेमन ने आरोप लगाया कि पिछले सत्र में भाजपा के कई प्रस्तावित कार्यक्रम और विधायी एजेंडे आगे नहीं बढ़ सके। सदन में हंगामे और चंदा चोरी तथा पेपर लीक जैसे मुद्दों के उठने के कारण अपेक्षित कामकाज नहीं हो पाया। सरकार चुनाव नजदीक आते देख कुछ विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश कर सकती है। विधेयकों पर देशहित, जनहित और संविधान के अनुरूप होने जैसे पहलुओं पर पर्याप्त विचार किए बिना उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिए पारित कराया जाता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लाने से पहले उस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि वह जनता तथा संविधान के हित में है या नहीं। विधेयकों को 'धकेलकर' या राजनीतिक प्रबंधन के जरिए पारित करना भविष्य में समस्याएं पैदा कर सकता है।

महाराष्ट्र में लागू हुए नए धर्मांतरण विरोधी कानून पर मेमन ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन पहले से ही मौजूदा कानूनों के तहत अपराध है। इसके लिए अलग कानून की जरूरत नहीं थी। यदि कोई व्यक्ति बालिग है और बिना किसी दबाव, लालच या जबरदस्ती के अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो संविधान उसे धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। वहीं, नाबालिग के मामले में अलग कानूनी स्थिति होती है।

मेमन ने 'लव जिहाद' जैसे नामों के आधार पर नए कानून बनाए जाने की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वयस्क व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

परेल-चिंचपोकली इलाके में ईद-ए-मिलादुन्नबी के दौरान दो समुदायों के बीच हुई झड़प को मेमन ने दुखद बताया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो और किसी तरह का टकराव न होने पाए। मुंबई पुलिस की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में ईद-ए-मिलाद के जुलूस शांतिपूर्वक निकले और केवल परेल-चिंचपोकली के पास छोटी घटना हुई। यदि कुछ लोगों ने कानून तोड़ा है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन घटना को बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

मेमन ने आने वाले गणेश उत्सव समेत अन्य त्योहारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र में विभिन्न समुदाय लंबे समय से मिल-जुलकर रहते हैं। कुछ असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिन्हें नाकाम करना जरूरी है।

कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर चीनी घोटाले के आरोपों के बीच चीनी की बढ़ती कीमतों पर भी मेमन ने निशाना साधा। उन्होंने भाजपा नेताओं की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया जिसमें अधिक उम्र के लोगों को कम चीनी खाने की सलाह दी गई थी। मेमन ने कहा कि किसी व्यक्ति को कितनी चीनी खानी है, यह डॉक्टर और संबंधित व्यक्ति का विषय है। सरकार की जिम्मेदारी चीनी की कीमतों को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ती कीमतों से गरीब परिवारों का बजट प्रभावित न हो।

उन्होंने कहा कि गरीब व्यक्ति के लिए चाय जैसी रोजमर्रा की चीज में भी चीनी जरूरी है। इसलिए सरकार को कीमतें कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यदि सरकार चीनी के दाम नियंत्रित करने में असफल रहती है, तो यह उसके लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से मुश्किल पैदा कर सकता है।

--आईएएनएस

पीएसके

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