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जब उषा खन्ना के हुनर पर उठे सवाल, लोगों ने कहा- इतनी कम उम्र की लड़की कैसे दे सकती है संगीत

जब उषा खन्ना के हुनर पर उठे सवाल, लोगों ने कहा- इतनी कम उम्र की लड़की कैसे दे सकती है संगीत
जब उषा खन्ना के हुनर पर उठे सवाल, लोगों ने कहा- इतनी कम उम्र की लड़की कैसे दे सकती है संगीत

मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे संगीतकार हुए हैं, जिनकी धुनों को फिल्मों से ज्यादा याद रखा गया। जब बात महिला संगीतकारों की होती है तो उषा खन्ना का नाम अपने आप दिमाग में आने लगता है।

उन्होंने उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, जब म्यूजिक डायरेक्शन को लगभग पूरी तरह पुरुषों का क्षेत्र माना जाने लगा था। जब उन्होंने फिल्म के लिए संगीत देना शुरू किया, तब उनकी उम्र करीब 17 साल थी।

7 अक्टूबर 1941 को ग्वालियर में जन्मीं उषा खन्ना का संगीत से जुड़ाव बचपन से था। उनके पिता मनोहर खन्ना गीतकार थे और इसी वजह से घर में संगीत का माहौल रहता था। उषा ने संगीत की ट्रेनिंग ली और धीरे-धीरे खुद धुनें बनाने लगीं। उनके टैलेंट की चर्चा उस समय के मशहूर संगीतकार ओपी नैय्यर तक पहुंची। उषा ने उनसे मुलाकात की और अपनी बनाई हुई धुनें सुनाईं। इसके बाद उन्हें फिल्म 'दिल देके देखो' में संगीत देने का मौका मिला।

यह मौका जितना बड़ा था, उतना ही मुश्किल भी। उषा की उम्र उस समय महज 17 साल थी और फिल्म की पूरी म्यूजिक टीम में ज्यादातर लोग उनसे उम्र और अनुभव में काफी बड़े थे। यही वजह थी कि जब उन्होंने फिल्म के लिए संगीत तैयार किया तो कई लोगों को भरोसा ही नहीं हुआ कि इतनी कम उम्र की लड़की इतनी बड़ी फिल्म का संगीत तैयार कर सकती है।

उनके बारे में कहा जाने लगा कि शायद उनके पीछे कोई और संगीतकार काम कर रहा है। उनकी प्रतिभा को मानने के बजाय लोग उनकी सफलता के पीछे किसी पुरुष का नाम तलाश रहे थे।

उषा खन्ना ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने अपने काम से जवाब दिया। 'दिल देके देखो' के गाने लोगों के बीच लोकप्रिय हुए। 'दिल देके देखो दिल देके देखो जी', 'हम और तुम और ये समां', 'बड़े हैं दिल के काले' और 'प्यार की कसम' जैसे गीतों ने फिल्म के संगीत को खास पहचान दिलाई।

उषा खन्ना ने आगे भी कई फिल्मों में संगीत दिया, जिनमें 'सौतन', 'दादा', 'साजन बिना सुहागन','आप तो ऐसे ना थे', 'बिन फेरे हम तेरे', 'शबनम', 'बादल', 'हनीमून', 'दो खिलाड़ी', 'गोपीचंद जासूस', 'आंख मिचोली', 'साजन की सहेली', 'अब क्या होगा', 'लाल बंगला', 'एक सपेरा एक लुटेरा' और 'दिल परदेसी हो गया' समेत कई नाम शामिल हैं। उनके संगीत में रोमांस से लेकर दर्द और जिंदगी के अलग-अलग रंग सुनाई दिए।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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