Samachar Nama
×

लोकसभा में बोले अमित शाह, 'जब बोलने का मौका होता है तब राहुल गांधी विदेश में होते हैं'

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित करते हुए कहा कि इस सदन के स्थापित इतिहास के अनुसार, इसकी कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर संचालित होती है। अध्यक्ष एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो सत्ताधारी दल और विपक्ष, दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्यक्ष सत्रों का संचालन किस प्रकार करें, इस संबंध में मार्गदर्शन के लिए इसी लोकसभा द्वारा विशिष्ट नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई बाजार नहीं है। सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही अपनी बात रखें और चर्चा में भाग लें।
लोकसभा में बोले अमित शाह, 'जब बोलने का मौका होता है तब राहुल गांधी विदेश में होते हैं'

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित करते हुए कहा कि इस सदन के स्थापित इतिहास के अनुसार, इसकी कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर संचालित होती है। अध्यक्ष एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो सत्ताधारी दल और विपक्ष, दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्यक्ष सत्रों का संचालन किस प्रकार करें, इस संबंध में मार्गदर्शन के लिए इसी लोकसभा द्वारा विशिष्ट नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई बाजार नहीं है। सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही अपनी बात रखें और चर्चा में भाग लें।

अमित शाह ने कहा कि हम लंबे समय से विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। हालांकि, न तो भाजपा और न ही एनडीए ने कभी ऐसा कोई प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सदन के स्पीकर संरक्षक होते हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है। यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। विपक्ष जब निर्णय की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है। ये हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बहुत अफसोसजनक घटना है।

उन्होंने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए। हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग की है।

उन्होंने कहा कि किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पड़ेगा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं।

अमित शाह ने कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है, इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए। तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे, लेकिन ओम बिरला एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं।

उन्होंने कहा कि जब आप अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाते हैं, तो आप एक अजीब तरह की स्थिति का निर्माण करते हैं। जिसको मध्यस्थता करनी है और जिसका संरक्षण आपको लोकसभा के कार्यकाल की समाप्ति तक चाहिए, उसी पर आप प्रश्न उठा रहे हैं। संविधान ने स्पीकर के पद को पार्टी से ऊपर उठाकर मध्यस्थ की भूमिका में रखा है। आपने मध्यस्थता करने वाले पर ही शंका के सवाल उठा दिए।

उन्होंने कहा कि नियम 375 के अधीन गंभीर अव्यवस्था के अवसर पर सदन को स्थगित करना पड़ता है। आप किसी को बोलने ही नहीं देंगे, चाहे कितने भी बड़े महत्वपूर्ण मुद्दे क्यों न हों। खड़े होकर आप विरोध करते रहेंगे और प्रधानमंत्री की सीट तक महिला सांसदों का आना मैं किसी भी प्रकार से उचित नहीं मानता, इसलिए नियम 375 के प्रावधानों के तहत ये शक्तियां स्पीकर को दी गई हैं।

उन्होंने कहा कि तीन बार, जब लोकसभा के स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, तब डिप्टी स्पीकर ने आगे की प्रक्रिया का संचालन किया। अब ये कह रहे हैं कि आपने डिप्टी स्पीकर अपॉइंट नहीं किया है। पहले जब दो बार ऐसा प्रस्ताव आया तब डिप्टी स्पीकर भी कांग्रेस के ही थे। अभी स्थान खाली है, यह मुद्दा उठाने का अधिकार आपको नहीं है।"

उन्होंने कहा कि ये लोग चाहते हैं कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस हो, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि पहले भी इनके परिवार में बड़े-बड़े नेता हुए हैं, लेकिन किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर संसद में बहस नहीं हो सकती।

अमित शाह ने राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान वो जर्मनी यात्रा पर थे। जब जब संसद सत्र चलता है, विदेश यात्रा लग जाती है और फिर कहते हैं कि बोलने नहीं देते। जो व्यक्ति विदेश में है, यहां कैसे बोलेगा। यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये सदन पक्ष, प्रतिपक्ष, स्पीकर और राष्ट्रपति को मिलाकर बनता है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि सदन में ऐसा कभी नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री बैठे हैं और दौड़कर आकर गले लग जाना। सदन में कभी फ्लाइंग किस किया जाता है तो कभी आंख मटकाई जाती है और ये लोग अब स्पीकर के बर्ताव पर सवाल उठा रहे हैं।

--आईएएनएस

एमएस/डीकेपी

Share this story

Tags