इतिहास को उसके समय के संदर्भ में समझना जरूरी : मनोज झा
नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएएनएस)। राजद के सांसद मनोज कुमार झा ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के उल्लेख और 1947 के विभाजन से जुड़े बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतिहास को उसके संदर्भ में समझना जरूरी है।
मनोज झा ने आईएएनएस से कहा कि महात्मा गांधी और उस दौर के अधिकांश नेता विभाजन के विरोध में थे, लेकिन उस समय की परिस्थितियां बेहद हिंसक थीं और खून-खराबा हो रहा था, इसलिए कुछ फैसले परिस्थितियों के दबाव में लेने पड़े। आज बैठकर भाषण देना आसान है, लेकिन उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को समझे बिना टिप्पणी करना उचित नहीं है। उस समय स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से कांग्रेस कर रही थी।
बता दें कि एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में बड़े बदलाव करते हुए लिखा है कि गांधी जी और कांग्रेस नेतृत्व विभाजन के विरोध में थे, लेकिन अंततः इसे आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मानकर स्वीकार किया गया।
मनोज झा ने एआई इम्पैक्ट समिट में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं हुई, बल्कि यह खबर भी फैलाई जा रही है कि वे इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड हैं। यह एक विरोध प्रदर्शन था और उन्होंने 1952 से अब तक के विरोध प्रदर्शनों का इतिहास अध्ययन किया है। उनके अनुसार लाल किला घटना, पहलगाम और पुलवामा जैसे मामलों में स्पष्ट रूप से मास्टरमाइंड तय नहीं हो पाया, लेकिन अब एक छोटे प्रदर्शन में अचानक मास्टरमाइंड मिल जाना सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए।
बिहार में स्कूल और धार्मिक स्थलों के किनारे खुले में नॉनवेज बेचने पर प्रतिबंध को लेकर उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा की राजनीति गिरिराज सिंह के मॉडल से प्रभावित लगती है। भारत विविधताओं और जटिलताओं वाला देश है, जहां सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताएं अलग-अलग हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गांव में एक मंदिर के पास स्कूल है और वहां पशु बलि की परंपरा भी है, ऐसे में केवल एक तरह की राजनीति समाधान नहीं हो सकती।
मनोज झा ने आगे कहा कि सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दों को उछालना उचित नहीं है और राजनीति में वैकल्पिक सोच की जरूरत है।
--आईएएनएस
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