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इस्तीफे और अंदरूनी कलह के बाद सिंटा में फिर से चुनाव, मुकेश ऋषि बोले- जहां मन न लगे, वो जगह छोड़ देनी चाहिए

इस्तीफे और अंदरूनी कलह के बाद सिंटा में फिर से चुनाव, मुकेश ऋषि बोले- जहां मन न लगे, वो जगह छोड़ देनी चाहिए
इस्तीफे और अंदरूनी कलह के बाद सिंटा में फिर से चुनाव, मुकेश ऋषि बोले- जहां मन न लगे, वो जगह छोड़ देनी चाहिए

मुंबई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। सिंटा (सिने एंड टीवी आर्टिस्टिस असोसिएशन) के कई सदस्यों के इस्तीफे और आंतरिक कलह के कारण शनिवार को चुनाव आयोजित करवाया गया। इसमें मनोरंजन जगत की तमाम हस्तियों ने शिरकत की।

अभिनेता मुकेश ऋषि, कुनिका सदानंद और बिंदु दारा सिंह ने वोट देने के बाद आईएएनएस के साथ बातचीत की।

मुकेश ऋषि ने कहा, "इलैक्शन होने थे क्योंकि ज्यादातर लोगों ने रिजाइन किया था। उसका दूसरा ऑप्शन तो यह है कि चुनाव होने चाहिए, जिसे चुनाव में आना है और खड़ा होना है। उन्हें दूसरा मौका मिला है। उसी वोटिंग के लिए मैं आया था और अपने सभी दोस्तों को शुभकामनाएं दी। हालांकि, शाम को पता चल जाएगा कि कौन जीतेगा और जो जीतेगा, उसे मेरी तरफ से बधाई। वे लोग सिंटा के लिए बेहतर काम करें।"

अभिनेता ने कहा, "मैं तो बस यही कहूंगा कि जहां मन न लगे वो जगह छोड़ देनी चाहिए। मैं भी उनमें से हूं। मुझे समझ में नहीं आ रहा था, तो मैंने छोड़ दिया था। अब वो (पद्मिनी और पूनम) क्या सोच रही हैं, क्या करना चाहती हैं, ये वो ही जानें।"

कुनिका सदानंद ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा, "देखकर मुझे खुशी हो रही है कि वोट फिर से हो रहे हैं और उम्मीद करती हूं कि जो नई कमेटी चुनकर आएगी, वो अच्छा काम करेगी। आर्टिस्ट के काम और पेमेंट की सिक्योरिटी होनी चाहिए, महिलाओं की सेफ्टी और आर्टिस्ट को समानता मिलनी चाहिए।"

बिंदु दारा सिंह ने कहा, "पहले सिंटा का टाइम दो साल का था, लेकिन हमने तीन साल कर दिया था। उस बीच कमेटी ने अच्छा काम किया था, लेकिन लड़ाइयां बहुत हो रही थी। उसके चक्कर में ग्रुप बन गए थे, वे आपस में लड़ते थे। तो चीजें खराब हो गई थीं, जिस वजह से जाने का मन भी नहीं करता था। अब जो लोग जीतकर आएंगे, मैं उनसे रिक्वेस्ट करता हूं कि सिंटा का काम ओपन कर दिया जाए, जिससे लोगों पता चले कि क्या हो रहा है।"

--आईएएनएस

एनएस/एबीएम

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