ईरानी राष्ट्रपति बोले 'हम युद्ध नहीं, संवाद चाहते हैं'
तेहरान, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच ईरान ने कहा है कि वो जंग की नहीं बल्कि बातचीत की ख्वाहिश रखता है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के हवाले से आईआरएनए न्यूज एजेंसी ने इसकी जानकारी दी।
बताया कि पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी टकराव का इच्छुक नहीं है और कहा कि विवादों का समाधान संवाद के जरिए ही संभव है।
इसके साथ ही पेजेश्कियन ने अमेरिका को चेतावनी भी दी। कहा कि वह ईरान पर अपनी शर्तें थोपने या उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का प्रयास न करे, क्योंकि ऐसी कोई भी कोशिश सफल नहीं हो पाएगी।
इसके साथ ही ईरानी राष्ट्रपति ने हालिया हमलों को लेकर भी कुछ प्रश्न खड़े किए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार नियमों के तहत नागरिकों, बच्चों, बुद्धिजीवियों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाना ठीक नहीं।
दोहराया कि ईरान शांति और संवाद के पक्ष में है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं बर्दाश्त करेगा।
अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर बढ़ती नाकेबंदी के बीच उन्होंने ये बात कही। दो हफ्ते का सीजफायर जारी है। इसी बीच इस्लामाबाद टॉक्स में स्थायी सुलह की उम्मीद बंधी, लेकिन 9-10 अप्रैल को चली मैराथन बैठक बेनतीजा रही।
इसके बाद अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इसका खामियाजा ईरान को ही भुगतना पड़ेगा। फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि होर्मुज की निगरानी अब अमेरिकी सेना करेगी। वहां से आने-जाने वाले उन जहाजों पर नजर रहेगी जो ईरान को कथित टोल दे रहे हैं और क्षेत्र को और सुरक्षित बनाया जाएगा।
वहीं, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की कि नाकेबंदी को सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। एक बयान में, सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि नाकेबंदी शुरू होने के महज 36 घंटों के भीतर, अमेरिकी सेना ने ईरान में आने-जाने वाले सभी समुद्री व्यापार को रोक दिया था।
--आईएएनएस
केआर/

