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ईरान युद्ध से बाजार में भारी गिरावट के बीच डिफेंस सेक्टर में जोरदार उछाल, एचएएल, बीईएल समेत ड्रोन शेयरों में जबरदस्त तेजी

मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ देखने को मिला।
ईरान युद्ध से बाजार में भारी गिरावट के बीच डिफेंस सेक्टर में जोरदार उछाल, एचएएल, बीईएल समेत ड्रोन शेयरों में जबरदस्त तेजी

मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ देखने को मिला।

सोमवार को घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,500 अंकों से ज्यादा (करीब 2 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 78,543.73 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी50 करीब 500 अंक (करीब 2 प्रतिशत) गिरकर 24,645.10 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

इस दौरान जहां अधिकतर सेक्टर लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए, वहीं डिफेंस सेक्टर में अच्छी तेजी देखने को मिली और रक्षा और ड्रोन सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। बढ़ते वैश्विक सैन्य तनाव के बीच रक्षा खर्च में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद ने इस सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

कारोबार के दौरान तेजस नेटवर्क्स, पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज और आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया। कुछ शेयरों में करीब 15 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

सरकारी डिफेंस कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। इन कंपनियों में आई तेजी ने पूरे डिफेंस इंडेक्स को सहारा दिया।

मौजूदा युद्ध जैसे हालात में निगरानी, सर्विलांस और सटीक हमलों के लिए ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे इस सेगमेंट की कंपनियों को लंबी अवधि में फायदा मिल सकता है।

बाजार जानकारों के अनुसार, जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या सैन्य तनाव बढ़ता है, तो देशों के रक्षा बजट में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो जाती है। इससे हथियार, मिसाइल सिस्टम, रडार, संचार उपकरण और ड्रोन जैसी तकनीकों की मांग बढ़ती है, जिसका सीधा लाभ रक्षा कंपनियों को मिलता है।

भारत पहले से ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) पर जोर दे रहा है और बजट आवंटन में लगातार वृद्धि कर रहा है। ऐसे में यदि वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है, तो पूंजीगत रक्षा खर्च और तेज हो सकता है, जिससे घरेलू कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता रह सकती है। इसके विपरीत, एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग की अनिश्चितता के कारण दबाव में आ सकता है।

फिलहाल निवेशकों की नजर रक्षा सेक्टर की अगली चाल पर टिकी हुई है। यदि वैश्विक तनाव बना रहता है, तो डिफेंस शेयरों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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