ईरान की स्थिति पर डॉ. मोमिन का संदेश, कहा- भारतीय मेडिकल छात्र सुरक्षित, घबराने की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। ईरान में अचानक इंटरनेट शटडाउन किए जाने के बाद वहां पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों और उनके परिजनों की चिंता काफी बढ़ गई। बच्चों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण देशभर में खासकर जम्मू-कश्मीर से जुड़े अभिभावकों में तनाव और बेचैनी का माहौल है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एआईएमएसए (ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और एफएआईएमए डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन ने स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. मोहम्मद मोमिन ने आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान बताया कि इंटरनेट बंद होने के कारण कई छात्रों ने वैकल्पिक तरीकों से उनसे संपर्क करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्र इराक बॉर्डर के पास चले गए थे और वहां से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से टेक्स्ट मैसेज के जरिए संपर्क किया। इन संदेशों में छात्रों ने साफतौर पर बताया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
डॉ. मोमिन ने बताया कि इस समय ईरान में लगभग 3,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 2,000 से अधिक छात्र एमबीबीएस और बीडीएस जैसे मेडिकल कोर्स कर रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से 1,800 से ज्यादा छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं।
उन्होंने कहा कि वह इन सभी छात्रों के सीधे संपर्क में हैं और लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
डॉ. मोमिन के अनुसार, भारतीय दूतावास की ओर से छात्रों की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें छात्रों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हॉस्टल में ही रहें, इंडोर गतिविधियों तक सीमित रहें और बिना जरूरत बाहर न निकलें। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और छात्रों की सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान में 24 जनवरी तक कक्षाएं और परीक्षाएं सस्पेंड कर दी गई हैं। इससे छात्रों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इंटरनेट बंद होने की वजह से पढ़ाई और परिवार से संपर्क दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
डॉ. मोमिन ने बताया कि पूरे दिन उन्हें तेहरान यूनिवर्सिटी, शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी, अहवाज़ और इस्फ़हान जैसे शहरों से छात्रों के फोन कॉल और मैसेज आते रहे। कुछ छात्रों ने बताया कि वे सुरक्षा कारणों से इराक बॉर्डर के नजदीक गए थे और वहीं से उन्होंने संपर्क किया।
उन्होंने यह भी बताया कि अभिभावकों के लिए एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें लगभग 1,800 अभिभावक जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप के जरिए वह लगातार पेरेंट्स को छात्रों की स्थिति, दूतावास की एडवाइजरी और ताजा अपडेट्स साझा कर रहे हैं, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों से बचा जा सके।
डॉ. मोमिन ने यह भी जानकारी दी कि एआईएमएसए और एफएआईएमए की ओर से प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा गया है। इस पत्र में ईरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता जताई गई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारतीय नागरिकों और छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल दूतावास या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्ट एवैकुएशन प्लान घोषित नहीं किया गया है। छात्रों को केवल यह कहा गया है कि अगर स्थिति गंभीर होती है, तो उन्हें निकाला जाएगा, लेकिन अभी किसी तरह की तैयारी या निर्देश नहीं दिए गए हैं।
डॉ. मोमिन ने भरोसा दिलाया कि वह लगातार छात्रों, अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं के संपर्क में हैं। जैसे ही स्थिति में कोई बदलाव होगा, उसकी जानकारी तुरंत पेरेंट्स और मीडिया के साथ साझा की जाएगी।
--आईएएनएस
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