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ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप सख्त, बोले ‘47 साल के कृत्यों की कीमत अभी नहीं चुकाई’

वाशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह जल्द ही इसकी समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में जो किया है, उसके लिए उसने “अब तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”
ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप सख्त, बोले ‘47 साल के कृत्यों की कीमत अभी नहीं चुकाई’

वाशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह जल्द ही इसकी समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में जो किया है, उसके लिए उसने “अब तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “मैं जल्द ही उस योजना की समीक्षा करूंगा जो ईरान ने हमें भेजी है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी, क्योंकि उन्होंने मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक बड़ी कीमत नहीं चुकाई है।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब तेहरान ने अमेरिका के साथ जारी तनाव खत्म करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया बताया जा रहा है। हालांकि, ट्रंप पहले ही इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जता चुके हैं और इसे अपर्याप्त बता रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने एक बहु-बिंदु योजना पेश की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और चरणबद्ध वार्ता जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।

इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन का रुख सख्त बना हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान की ओर से "गलत कदम" उठाए जाते हैं, तो सैन्य विकल्प भी फिर से अपनाए जा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी समझौता तभी संभव है जब अमेरिका को संतोषजनक सुरक्षा आश्वासन मिले, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर।

ट्रंप का यह बयान वार्ता पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। एक ओर अमेरिका बातचीत के दरवाजे खुले रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्प को भी सक्रिय रूप से बनाए हुए है।

इस बीच, ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा और किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच अविश्वास और रणनीतिक मतभेद अब भी बरकरार हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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