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ईरान का तर्क, 'हमने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की'

तेहरान, 1 जून (आईएएनएस)। ईरान का कहना है कि उन पर हो रहे हवाई हमलों के जवाब में उन्होंने अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बनाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तर्क दिया कि आत्मरक्षा के कानूनी अधिकार के तहत कार्रवाई की गई। इसके साथ ही उन्होंने ईयू के 'सिलेक्टिव अप्रोच' पर भी सवाल खड़े किए।
ईरान का तर्क, 'हमने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की'

तेहरान, 1 जून (आईएएनएस)। ईरान का कहना है कि उन पर हो रहे हवाई हमलों के जवाब में उन्होंने अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बनाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तर्क दिया कि आत्मरक्षा के कानूनी अधिकार के तहत कार्रवाई की गई। इसके साथ ही उन्होंने ईयू के 'सिलेक्टिव अप्रोच' पर भी सवाल खड़े किए।

बाघेई ने कहा कि ईरान को उन “क्षेत्रीय ठिकानों और संपत्तियों” पर जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है, जिनका उपयोग उसके खिलाफ हमले करने के लिए किया जा रहा है। यह बयान कुवैत के उस बयान के बाद आया जिसमें उसने मिसाइल और ड्रोन हमलों का जिक्र किया था।

ईरानी प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा कि देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपनी जमीन या संसाधनों का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमले के लिए न होने दें।

उन्होंने यूरोपीय संघ (ईयू) पर भी आरोप लगाया कि वह इस मामले में “चुनिंदा नैतिक प्रतिक्रिया” दे रहा है। उन्होंने कहा कि ईयू का वह बयान, जिसमें ईरान की कार्रवाई को “आत्मरक्षा” के नाम पर गलत बताया गया है, उनके “पाखंड और लापरवाह” रवैए को दर्शाता है।

बाघेई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस ईयू बयान का जिक्र कर रहे थे। हाल ही में ईयू की विदेश सेवा ने ईरान के कुवैत पर कथित हमलों की आलोचना करते हुए कहा था कि ये कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

वहीं, विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस वार्ता में बाघेई ने लेबनान पर इजरायली हमले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “हम इस बात पर जोर देते हैं कि लेबनान में संघर्ष समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते की एक जरूरी शर्त सीजफायर है,” जबकि इजरायल लेबनान में अपना सैन्य अभियान बढ़ा रहा है।

ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रक्रिया में देरी का कारण अविश्वास, वाशिंगटन के विरोधाभासी रुख और लेबनान पर इजरायल के हमले हैं।

उन्होंने कहा, “वार्ता गंभीर संदेह और अविश्वास के माहौल में शुरू हुई है और इसी माहौल में संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। दूसरा पक्ष लगातार अपने विचार बदल रहा है और नए या विरोधाभासी शर्तें रख रहा है, इसलिए बातचीत लंबी खिंचना स्वाभाविक है।”

--आईएएनएस

केआर/

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