Samachar Nama
×

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने रिश्वत मामले में जांच के आदेश: केरलम विजिलेंस करेगी पड़ताल, ₹2 करोड़ मांगने का आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने रिश्वत मामले में जांच के आदेश: केरलम विजिलेंस करेगी पड़ताल, ₹2 करोड़ मांगने का आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरलम सरकार ने उनके खिलाफ करीब 20 साल पुराने कथित रिश्वत मामले में विजिलेंस जांच को मंजूरी दी है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। यह मामला वर्ष 2006 में केरल में हुए एक सड़क निर्माण प्रोजेक्ट से जुड़ा है। उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे।

ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े ठेकेदारों के बिल पास करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह आरोप एक पूर्व ठेकेदार वीओ साजन ने अपनी शिकायत में लगाया है। हालांकि, ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और विजिलेंस जांच में इनकी पड़ताल की जाएगी।

मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़ा है मामला

यह मामला भारत-मलेशिया की संयुक्त कंपनी PATI-BEL से जुड़ा है, जिसे केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत एमसी रोड के विकास का काम मिला था। कंपनी में मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे।नवंबर 2005 में ली सी बीन ने मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। शिकायतकर्ता साजन का दावा है कि परियोजना से जुड़े करीब 17 करोड़ रुपये के बिल इंजीनियरों की मंजूरी के बावजूद जारी नहीं किए जा रहे थे। आरोप है कि इन बिलों का भुगतान करने के लिए तत्कालीन PWD सचिव ज्ञानेश कुमार ने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।साजन के मुताबिक, ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि रिश्वत दिए बिना भुगतान की मंजूरी नहीं मिल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इंजीनियर ने अपने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम लिया था। हालांकि, सुसाइड नोट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

पूर्व ठेकेदार की शिकायत पर कार्रवाई

इस मामले में कोल्लम जिले के रहने वाले पूर्व ठेकेदार वीओ साजन ने विजिलेंस विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने दावा किया कि वह परियोजना में सामग्री की आपूर्ति करते थे और इंजीनियर ली सी बीन के साथ काम कर चुके थे।साजन ने अपनी शिकायत में कहा कि भुगतान में देरी के कारण कंपनी और स्थानीय ठेकेदारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा था। उन्होंने जांच एजेंसी को ली सी बीन के परिवार के सदस्यों, कंपनी के पूर्व कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है।शिकायत के बाद विजिलेंस विभाग ने प्रारंभिक जांच की और मामला दर्ज करने के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी। कानूनी राय मिलने के बाद सरकार ने आगे की कार्रवाई को मंजूरी दी।

पहले भी हुई थी जांच, लेकिन आरोप साबित नहीं हुए

इस मामले की जांच पहले भी की गई थी। वर्ष 2006 में ली सी बीन की आत्महत्या के बाद विजिलेंस ने सड़क निर्माण परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। इसमें ठेकेदारों को भुगतान, टेंडर प्रक्रिया और बिलों की मंजूरी से जुड़े आरोप शामिल थे।

हालांकि, पिछली जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी थी और आगे की कार्रवाई नहीं करने की सिफारिश की गई थी। केरलम के गृह मंत्री चेन्निथला ने विधानसभा में भी बताया था कि पहले की जांच में आरोप साबित नहीं हुए थे। अब नई शिकायत के आधार पर पुराने मामले और पिछली जांच की प्रक्रिया की दोबारा पड़ताल की जाएगी।

SIR विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह जांच ऐसे समय शुरू हुई है, जब देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।हालांकि, केरलम सरकार ने इस पुराने मामले की जांच को SIR विवाद से अलग बताया है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार पर लगे रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। विजिलेंस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Share this story

Tags