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भारत की अनोखी उल्टी बहने वाली नदी: जानिए इसका रहस्य

भारत की अनोखी उल्टी बहने वाली नदी: जानिए इसका रहस्य

भारत प्राकृतिक संसाधनों और नदियों के खजाने के रूप में दुनिया में जाना जाता है। देश में हजारों नदियां बहती हैं, जिनमें गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी प्रमुख नदियों का नाम सबसे पहले लोगों के मन में आता है। नॉर्थ ईस्ट की बात करें तो ब्रह्मपुत्र नदी भी देश की प्रमुख नदियों में गिनी जाती है। सामान्यत: भारत की अधिकतर नदियां पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं और अंततः बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती हैं।

लेकिन भारत में एक ऐसी नदी भी है, जो बाकी नदियों के विपरीत बहती है। इसे हम कह सकते हैं “उल्टी बहने वाली नदी”। इस नदी का बहाव सामान्य नदियों से अलग दिशा में होता है और इसकी यह खासियत इसे वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

इस नदी का नाम है इंद्रावती नदी। यह नदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा के क्षेत्र से होकर गुजरती है। सामान्य नदियों के बहाव के विपरीत, इंद्रावती नदी दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है, और इसके साथ जुड़े छोटे जलस्रोत और नदियां भी इसी दिशा में मिलती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका यह उल्टा बहाव क्षेत्रीय भूगर्भीय संरचना और स्थलाकृति के कारण संभव हुआ है।

इंद्रावती नदी और इसके तटवर्ती क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां की घाटियां, जलाशय और जंगल जैव विविधता का अनोखा संगम प्रस्तुत करते हैं। नदी के किनारे कई आदिवासी समुदाय रहते हैं, जिनका जीवन और संस्कृति इस नदी से गहराई से जुड़ा हुआ है। ये लोग नदी पर निर्भर रहते हुए खेती, मत्स्य पालन और जल संसाधनों का उपयोग करते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से उल्टी बहने वाली नदियों का अध्ययन महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे भूगर्भीय बदलाव, मिट्टी और जल प्रवाह की दिशा में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी मिलती है। इंद्रावती जैसी नदियां जल संरक्षण और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से भी अध्ययन और संरक्षण के योग्य हैं।

यद्यपि अधिकांश लोग गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियों से परिचित हैं, लेकिन इंद्रावती जैसी अनोखी नदियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। यह न केवल प्राकृतिक चमत्कार की याद दिलाती है, बल्कि देश की जल संपदा और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

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