बिहार समेत भारत के कई हिस्सों में पाया जाने वाला लाल रेत बोआ (Red Sand Boa) एक ऐसा सांप है, जो अपनी अनोखी बनावट और आदतों के कारण विज्ञान और सोशल मीडिया दोनों में चर्चा में रहता है। इसे आम भाषा में लोग “दो मुंहा सांप” भी कहते हैं। हालांकि, इसका नाम सुनकर लोगों को अक्सर भ्रम होता है। वास्तविकता यह है कि लाल रेत बोआ के दो मुंह नहीं होते।
इस सांप की सबसे अनोखी बात इसकी पूंछ का सिर जैसी दिखना है। इसका यह जैविक निर्माण उसके शिकारियों से सुरक्षा का एक तरीका है। जब कोई शिकारी इसे पकड़ने की कोशिश करता है, तो यह अपने आप को उलझा कर या पूंछ दिखाकर अपने दुश्मनों को भ्रमित कर देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विशेषता के कारण यह अपने आप को सुरक्षित रखने में सक्षम होता है।
लाल रेत बोआ का रंग और बनावट लाल मिट्टी या रेतीली जगहों के साथ आसानी से घुलमिल जाती है। यह छोटे जानवरों और कीटों का शिकार करता है और अपनी खुदाई की आदतों के लिए जाना जाता है। यह ज्यादातर जमीन के अंदर रहना पसंद करता है और दिन के समय छुपा रहता है।
यह सांप गैर-विषैला और हानिरहित माना जाता है। मानव के लिए इसका कोई खतरा नहीं है और यह कभी भी हमला नहीं करता। इसके बावजूद, लाल रेत बोआ की विदेशी बाजारों में काफी मांग है। इसकी सुंदरता और अनोखी बनावट इसे विदेशों में पालतू जानवरों या सजावटी उद्देश्यों के लिए लोकप्रिय बनाती है।
सांप विशेषज्ञों का कहना है कि लाल रेत बोआ के प्रति लोगों को जागरूक होना चाहिए। इसे देखकर डरने या मारने की बजाय इसे सुरक्षित और प्राकृतिक आवास में रहने देना चाहिए। यह न केवल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण में जैविक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है।
स्थानीय लोग अक्सर लाल रेत बोआ को देखकर डर जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सांप की सुरक्षा और व्यवहार को समझना बहुत जरूरी है। बच्चों और ग्रामीणों को इसके बारे में जानकारी देना महत्वपूर्ण है ताकि लोग इसे सुरक्षित तरीके से देख सकें और किसी प्रकार की हानि न पहुंचे।

