आसमान के सबसे करीब बसा भारत का कोमिक गांव, जहां पेड़ भी तोड़ देते हैं दम; गोबर के भरोसे कटती हैं रातें
भारत में कई ऐसे गांव हैं, जो अपनी अनोखी भौगोलिक परिस्थितियों और जीवनशैली के कारण पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करते हैं। हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में स्थित कोमिक गांव भी ऐसा ही एक गांव है। समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह गांव दुनिया के सबसे ऊंचे बसे गांवों में गिना जाता है। यहां की जिंदगी मैदानी इलाकों से बिल्कुल अलग है। ऑक्सीजन की कमी, कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच ग्रामीण बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं।
कोमिक को भारत के सबसे ऊंचे गांवों में शामिल किया जाता है, जहां साल के कई महीनों तक मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है। यहां पेड़-पौधों का ज्यादा उग पाना मुश्किल है। ऊंचाई और कठोर जलवायु के कारण वनस्पतियों की संख्या बेहद कम है। यही वजह है कि गांव के आसपास दूर-दूर तक बंजर पहाड़ और सूखा इलाका दिखाई देता है।
पेड़ भी यहां नहीं टिक पाते
कोमिक में तापमान लंबे समय तक बेहद कम रहता है। सर्दियों में पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढक जाता है। इतनी अधिक ऊंचाई पर वातावरण में ऑक्सीजन भी समुद्र तल की तुलना में कम होती है। कठोर मौसम के कारण यहां बड़े पेड़ उगना बेहद मुश्किल है।
गांव के आसपास हरियाली बेहद सीमित दिखाई देती है। स्थानीय लोग अपनी जरूरत के लिए सीमित कृषि करते हैं और पशुपालन पर भी काफी निर्भर रहते हैं। यहां खेती भी मौसम और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
गोबर से गर्म रहती हैं रातें
कोमिक में सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए घर को गर्म रखना बड़ी चुनौती होती है। लकड़ी और अन्य ईंधन आसानी से उपलब्ध नहीं होने के कारण पशुओं के गोबर से बने उपलों का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जाता है।
गोबर को सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। सर्दियों में इन्हीं उपलों को जलाकर खाना पकाया जाता है और घरों में गर्मी बनाए रखने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि यहां की कठिन जिंदगी को समझाने के लिए अक्सर कहा जाता है कि ग्रामीणों की रातें गोबर के भरोसे कटती हैं।
कुछ महीने ही चलती है सामान्य जिंदगी
कोमिक में सर्दियों का मौसम बेहद लंबा होता है। भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो सकती हैं और आसपास के इलाकों से संपर्क मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण पहले से ही जरूरी सामान और ईंधन जमा करके रखते हैं।
गर्मी के कुछ महीनों में मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल होता है। इसी दौरान खेती, पशुपालन और दूसरे जरूरी काम किए जाते हैं। स्थानीय लोग बेहद सीमित संसाधनों में अपनी जिंदगी चलाते हैं।
पर्यटन बना आय का बड़ा जरिया
कठिन परिस्थितियों के बावजूद कोमिक अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। ऊंचाई, बर्फ से ढके पहाड़, अनोखी भौगोलिक परिस्थितियां और पारंपरिक जीवनशैली पर्यटकों को यहां खींचती है। गांव में स्थित प्राचीन तांग्युड मठ भी प्रमुख आकर्षण है।
कोमिक की कहानी यह बताती है कि इंसान किस तरह बेहद कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच भी जीवन का रास्ता खोज लेता है। जहां पेड़ उगना मुश्किल है और सर्दियों में तापमान जीवन को चुनौती देता है, वहां ग्रामीण पशुपालन, सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के सहारे अपनी जिंदगी आगे बढ़ाते हैं। यही कठिन जीवनशैली कोमिक को भारत के सबसे अनोखे गांवों में शामिल करती है।

