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भारतीय रेलवे की अद्भुत तकनीक: ट्रेन की पटरियों में जंग नहीं क्यों लगती?

भारतीय रेलवे की अद्भुत तकनीक: ट्रेन की पटरियों में जंग नहीं क्यों लगती?

भारतीय रेलवे का नाम अब सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में उसकी अद्भुत इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीकों के लिए जाना जाता है। देश का रेल नेटवर्क लाखों लोगों को रोजाना जोड़ता है और यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और आरामदायक सफर देने में सक्षम है। यही वजह है कि जब कोई विदेशी यात्री भारतीय ट्रेनों में सफर करता है, तो वह रेलवे की व्यवस्थाओं और तकनीक से काफी प्रभावित होता है। कई यात्री अपनी इस अनोखी अनुभव को व्लॉग और सोशल मीडिया पर शेयर करके वायरल भी कर देते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि भारतीय रेलवे की रेल पटरियों (रेलवे ट्रैक) में जंग नहीं लगती? यह बात साधारण दिखती है, लेकिन इसके पीछे की तकनीक और विज्ञान बेहद चौंकाने वाला है।रेलवे ट्रैक आमतौर पर स्टील (Steel) से बनी होती हैं, और सामान्य परिस्थितियों में स्टील पर समय के साथ जंग लग सकती है। लेकिन भारतीय रेलवे की पटरियों में जंग नहीं लगती, और इसका कारण है विशेष स्टील मिश्रण और रखरखाव की प्रणाली।

सबसे पहले, रेलवे की पटरियों में इस्तेमाल होने वाला स्टील कार्बन और मिश्र धातु (Alloy) से तैयार किया जाता है, जिससे यह जंग और घिसाई (Corrosion & Wear) के प्रति बेहद मजबूत बनती हैं। इस मिश्र धातु में लौह, कार्बन, क्रोमियम और अन्य तत्व ऐसे होते हैं जो जंग लगने की प्रक्रिया को रोकते हैं।दूसरी बात, रेलवे ट्रैक नियमित रूप से सुरक्षा और रखरखाव के लिए निरीक्षण के अधीन रहती है। इसमें तेल या जंगरोधी पदार्थ (Anti-Corrosive Coating) का प्रयोग भी किया जाता है, जो स्टील की सतह को नमी और बारिश से होने वाले प्रभाव से बचाता है। इसके अलावा, ट्रेन के पहियों द्वारा पटरियों की सतह लगातार साफ और पोलिश होती रहती है, जिससे जंग का खतरा और भी कम हो जाता है।

तीसरी और अहम बात यह है कि भारतीय रेलवे की पटरियों को सही जल निकासी प्रणाली के साथ रखा जाता है। पटरियों के नीचे और आसपास ग्रेवल और सपोर्टिंग संरचना होती है, जो पानी को जमा होने नहीं देती और जंग के लिए अनुकूल परिस्थितियों को रोकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक की जंगरोधी तकनीक सिर्फ भारतीय रेलवे की मजबूती और लंबी उम्र ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के सुचारू संचालन को भी सुनिश्चित करती है। यह छोटी-सी लेकिन महत्वपूर्ण तकनीक रेलवे के अद्वितीय इंजीनियरिंग कौशल को दिखाती है।

संक्षेप में, भारतीय रेलवे की पटरियों में जंग न लगने का कारण है विशेष मिश्रित स्टील, जंगरोधी कोटिंग, नियमित रखरखाव और स्मार्ट डिजाइन। यही कारण है कि भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे मजबूत और सुरक्षित नेटवर्क में गिना जाता है। इस तरह, अगली बार जब आप ट्रेन में सफर करें और पटरियों को देखें, तो जान लें कि यह सिर्फ स्टील की पटरी नहीं है, बल्कि सौ सालों की तकनीक और विज्ञान का अद्भुत परिणाम है।

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