भारतीय नौसेना को मिलेंगे 8 नए युद्धपोत, ₹53,866 करोड़ का समझौता; 2030 तक मिलेंगे सभी नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने नौसेना के लिए 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) बनाने के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन युद्धपोतों में आधुनिक मिसाइल, हथियार और अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम लगाए जाएंगे। इनकी मदद से भारतीय नौसेना समुद्र, हवा और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का मुकाबला करने में और सक्षम होगी।
इस परियोजना के तहत देश की दो प्रमुख सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनियां युद्धपोतों का निर्माण करेंगी। कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) को पांच युद्धपोत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) तीन युद्धपोत तैयार करेगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों पर रखेंगे नजर
नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट आधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत होंगे। इनमें अत्याधुनिक मिसाइल, हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए जाएंगे। इनकी मदद से भारतीय नौसेना समुद्र में अलग-अलग तरह के खतरों की पहचान कर उनका जवाब दे सकेगी।
इन युद्धपोतों को खास तौर पर समुद्री सुरक्षा और सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा। इनका इस्तेमाल समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई तथा तटीय इलाकों की निगरानी में किया जाएगा। इसके अलावा समुद्र के किनारे सैन्य अभियान चलाने में भी ये युद्धपोत अहम भूमिका निभाएंगे।
70 फीसदी से ज्यादा सामान भारत में बनेगा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आठों युद्धपोतों के निर्माण में 70 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी इनके निर्माण में भारतीय कंपनियों और घरेलू तकनीक की बड़ी भूमिका रहेगी। इन युद्धपोतों का डिजाइन भी भारतीय नौसेना तैयार करेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि सभी आठ युद्धपोत वर्ष 2030 तक भारतीय नौसेना को सौंप दिए जाएं। इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
इससे देश में रक्षा उपकरणों और युद्धपोतों के निर्माण की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने और भारतीय उद्योगों को नए अवसर देने में मदद मिलेगी।
10 साल में 532 लाख कामकाजी दिनों के बराबर रोजगार का अनुमान
इस परियोजना से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, अगले 10 वर्षों में युद्धपोतों के निर्माण से शिपयार्ड में करीब 72 लाख और उनसे जुड़े उद्योगों में लगभग 460 लाख कामकाजी दिनों के बराबर रोजगार पैदा हो सकता है।
इस तरह कुल मिलाकर 532 लाख कामकाजी दिनों के बराबर रोजगार मिलने का अनुमान है। इस परियोजना में सरकारी रक्षा कंपनियों के अलावा निजी शिपयार्ड और देश के विभिन्न उद्योग भी भागीदारी करेंगे।
युद्धपोतों के निर्माण के लिए कई तरह के उपकरणों, मशीनों और तकनीकी सेवाओं की जरूरत होगी। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी काम मिलने की संभावना है।
भारतीय रक्षा क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती
आठ नए नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट का निर्माण भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आधुनिक हथियारों और सेंसर सिस्टम से लैस ये युद्धपोत समुद्री सीमाओं की निगरानी, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने में मदद करेंगे।

