2030 तक भारत-स्वीडन व्यापार और निवेश दोगुना करने का लक्ष्य, एआई और नई तकनीक होंगे साझेदारी के प्रमुख आधार: राजदूत
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और स्वीडन ने अपनी नई रणनीतिक साझेदारी के तहत वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। भारत के स्वीडन में राजदूत अनुराग भूषण ने गुरुवार को कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नवाचार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में भारतीय राजदूत अनुराग भूषण ने कहा कि नया ढांचा पारंपरिक आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी के निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था और कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक रोडमैप भी अपनाया गया था।
उन्होंने कहा, "दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने 2030 तक व्यापार और निवेश को दोगुना करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।"
भूषण के अनुसार, आर्थिक सहयोग इस रणनीतिक साझेदारी के चार प्रमुख स्तंभों में से एक है। अन्य स्तंभों में सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियां और लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के बाद से दोनों सरकारें पांच वर्षीय कार्ययोजना के माध्यम से राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को वास्तविक कारोबारी परिणामों में बदलने पर काम कर रही हैं। इसके तहत भारतीय राज्यों और उद्योग संगठनों के कई प्रतिनिधिमंडलों ने स्वीडन का दौरा किया है, ताकि निवेश और साझेदारी के नए अवसर तलाशे जा सकें।
भारत-स्वीडन संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रस्तावित स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर है, जिसका उद्देश्य उभरती तकनीकों, नवाचार और उन्नत डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।
भूषण ने कहा कि दोनों देशों के पास मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप्स हैं, जिससे एआई, सूचना प्रौद्योगिकी और भविष्य की संचार तकनीकों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, "स्वीडन तकनीक और एआई के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा, बड़ा बाजार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था है।"
उन्होंने विशेष रूप से गोथेनबर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर स्वीडन के प्रौद्योगिकी और एआई उद्योग का प्रमुख केंद्र बन चुका है और दोनों देशों की कंपनियों, स्टार्टअप्स तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण हब बन सकता है।
भूषण ने कहा कि स्वीडिश कंपनियों के पास अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता है, लेकिन उनका घरेलू बाजार अपेक्षाकृत छोटा है। ऐसे में भारत उनके लिए विस्तार, परीक्षण और नई तकनीकों के व्यावसायिक उपयोग का आकर्षक गंतव्य बनकर उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित टेक्नोलॉजी कॉरिडोर एआई, डिजिटल इनोवेशन और 6जी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त शोध, स्टार्टअप साझेदारी, कारोबारी सहयोग और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देगा।
राजदूत ने यह भी बताया कि भारत में काम कर रही स्वीडिश कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां एक वर्ष पहले ऐसी कंपनियों की संख्या लगभग 275 थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 300 हो गई है।
उन्होंने कहा कि दोनों देश 'मेक इन इंडिया, मेक विद स्वीडन' मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसके तहत स्वीडन की तकनीकी क्षमता और नवाचार को भारत की विनिर्माण शक्ति तथा विशाल बाजार के साथ जोड़ा जाएगा।
भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए भूषण ने कहा कि 2027 में भारत में प्रस्तावित भारत-स्वीडन द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन व्यापार जगत, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा और 2047 तक दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने में मदद करेगा।
उन्होंने इंडिया-स्वीडन इनोवेशन डे जैसी पहलों को भी महत्वपूर्ण बताया, जो स्टार्टअप्स, सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और निजी कंपनियों को व्यावहारिक सहयोग के अवसर तलाशने में मदद करती हैं।
भूषण ने आगे कहा, "ऐसे मंच रणनीतिक साझेदारी को वास्तविक परिणामों में बदलने का काम करते हैं।"
--आईएएनएस
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