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भारत के स्पेस सेक्टर का आकार अगले 10 वर्षों में बढ़कर 45 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद : डॉ.जितेंद्र सिंह

अहमदाबाद, 11 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं और यह मौजूदा 9 अरब डॉलर से बढ़कर अगले 10 वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारत के स्पेस सेक्टर का आकार अगले 10 वर्षों में बढ़कर 45 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद  : डॉ.जितेंद्र सिंह

अहमदाबाद, 11 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं और यह मौजूदा 9 अरब डॉलर से बढ़कर अगले 10 वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

'आत्मनिर्भर अंतरिक्ष अभियान' कार्यक्रम के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पांच वर्ष पहले स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोला था। यह सेक्टर विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि इससे युवाओं के लिए मौके बढ़े हैं और आज देश में 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप मौजूद हैं। साथ ही कि वर्तमान समय में इस सेक्टर में और निवेश की आवश्यकता है और सेक्टर को एफडीआई में जो छूट मिली हुई है। उसका फायदा कैसे लिया जा सकता है। इस पर काम करने की जरूरत है।

इस कार्यक्रम में निवेश को लेकर पूछे गए एक सवाल पर सिंह ने कहा कि टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए पैसे की भी जरूरत होती है। हम पैसे का इंतजाम कैसे करते हैं, कितनी कुशलता से ऐसा कर पाते हैं और किस हद तक कर पाते हैं, इससे ही उस लक्ष्य तक पहुंचने की हमारी क्षमता तय होगी, जिसकी हम कल्पना कर रहे हैं। इसीलिए मैं बार-बार कह रहा हूं कि हमें देश और विदेश से ज्यादा से ज्यादा निवेश की जरूरत है, चाहे वह दान के रूप में हो, फाउंडेशन से हो या बिजनेस से हो।

वहीं, रक्षा क्षेत्र पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अब रक्षा क्षेत्र में भी पहचान बना रहा है, उदाहरण के लिए, हमारी ब्रह्मोस मिसाइल का अब निर्यात किया जा रहा है। इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश हमारी मिसाइलों को लेकर बहुत उत्साहित हैं। साथ ही, हमारे उपकरण कनाडा, फ्रांस और कुछ यूरोपीय देशों को भी भेजे जा रहे हैं। इस तरह, रक्षा क्षेत्र में हमारे स्वदेशी उत्पादों, चाहे वे परमाणु-संचालित हों या अंतरिक्ष तकनीक पर आधारित, ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और स्वीकार्यता बना ली है।"

--आईएएनएस

एबीएस

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