जून में भारत का कोयला उत्पादन 14.9 प्रतिशत बढ़कर 1.79 करोड़ टन पहुंचा, अप्रैल में करीब 13 प्रतिशत कम हुआ आयात: सरकार
नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में कैप्टिव और वाणिज्यिक (कमर्शियल) कोयला खदानों से जून 2026 में 1.788 करोड़ टन (17.88 मिलियन टन) कोयले का उत्पादन हुआ, जबकि इसी अवधि में 1.855 करोड़ टन (18.55 मिलियन टन) कोयले की आपूर्ति (डिस्पैच) की गई। कोयला मंत्रालय के अनुसार, जून 2025 में उत्पादन 1.556 करोड़ टन था, जिसके मुकाबले इस वर्ष जून में 14.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खनन क्षेत्र ने उत्पादन और आपूर्ति दोनों में सकारात्मक प्रदर्शन किया। इस अवधि में कुल कोयला उत्पादन में 5.35 प्रतिशत और कोयला डिस्पैच में 1.70 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
मंत्रालय के अनुसार, यह बेहतर प्रदर्शन सरकार की नीतिगत पहलों, नियामकीय सुधारों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार समन्वय का परिणाम है।
बयान में कहा गया कि खदानों के संचालन, क्षमता उपयोग (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) और उत्पादन योजना में लगातार सुधार के कारण उत्पादन में यह बढ़त देखने को मिली है।
मंत्रालय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान उर्तन, धिरौली और बिक्रम नामक तीन नई कोयला खदानों में उत्पादन शुरू हो गया है। इन तीनों खदानों की संयुक्त पीक रेटेड कैपेसिटी (पीआरसी) 7.51 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) है।
इनमें उर्तन एक कोकिंग कोल ब्लॉक है, जिसकी शुरुआत विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कोकिंग कोल इस्पात (स्टील) उत्पादन के लिए प्रमुख कच्चा माल है। मंत्रालय का कहना है कि इससे घरेलू स्टील उद्योग को देश में उपलब्ध कोकिंग कोल की आपूर्ति बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 से 2026-27 के बीच पहली तिमाही के दौरान कैप्टिव और कमर्शियल खदानों के कोयला उत्पादन में करीब 10.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई है, जो घरेलू कोयला उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी का संकेत है।
वहीं, एक अन्य आधिकारिक बयान में कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि भारत के कोयला आयात में अप्रैल 2026 में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। देश का कुल कोयला आयात घटकर 21.13 मिलियन टन (एमटी) रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 24.27 मिलियन टन था। यानी एक साल में 3.14 मिलियन टन (करीब 12.95 प्रतिशत) की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट कोयला मंत्रालय द्वारा घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्रों द्वारा आयातित कोयले का उपयोग पिछले साल की तुलना में काफी कम हुआ है। अप्रैल 2025 में जहां बिजली संयंत्रों ने 4.67 मिलियन टन कोयला आयात किया था, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर 3.51 मिलियन टन रह गया। यानी इस श्रेणी में 24.89 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मंत्रालय का कहना है कि घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता और नियमित आपूर्ति के कारण आयात की आवश्यकता कम हुई है। जो बिजली संयंत्र पूरी तरह आयातित कोयले पर निर्भर हैं, उनमें कोयले का आयात सबसे अधिक घटा है। इन संयंत्रों का आयात 3.97 मिलियन टन से घटकर 2.88 मिलियन टन रह गया, जो 27.45 प्रतिशत की गिरावट है। यह सभी श्रेणियों में सबसे बड़ी कमी है।
बयान के अनुसार, देश की कुल कोयला खपत में आयातित कोयले की हिस्सेदारी भी कम हुई है। अप्रैल 2025 में कुल खपत का 21.69 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा हो रहा था, जो अप्रैल 2026 में घटकर 19.68 प्रतिशत रह गया। यानी आयात पर निर्भरता में 2 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि, इस्पात उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल के आयात में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका आयात 5.93 मिलियन टन से बढ़कर 6.01 मिलियन टन हो गया, जो 1.34 प्रतिशत की वृद्धि है। मंत्रालय ने बताया कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के सीमित भंडार होने और स्टील उत्पादन बढ़ने के कारण इस श्रेणी में आयात अभी भी आवश्यक बना हुआ है।
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